Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को प्रशिक्षण, पंजीकरण और प्राथमिक उपचार की भूमिका देने की मांग, मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
सात प्रमुख मांगों के जरिए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित करने की पहल
बस्ती, 28 सितंबर 2026।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक वेलफेयर एसोसिएशन (उत्तर प्रदेश) ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों के प्रशिक्षण, पंजीकरण, कानूनी पहचान और प्राथमिक उपचार की भूमिका निर्धारित किए जाने समेत सात प्रमुख मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत किया। संगठन की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम त्रिपाठी ने ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यकर्ताओं को व्यवस्थित किए जाने की मांग उठाई।
एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य सेवक लंबे समय से लोगों को प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। संगठन के अनुसार, यदि उनकी योग्यता एवं कार्यक्षमता के अनुरूप प्रशिक्षण, पंजीकरण और आवश्यक सरकारी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तो ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है।
“झोलाछाप डॉक्टर” कहकर अपमानित न करने की मांग
एसोसिएशन ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को “झोलाछाप डॉक्टर” कहकर अपमानित किए जाने के बजाय उन्हें उनकी वास्तविक भूमिका के अनुरूप व्यवस्थित स्वास्थ्य सेवक के रूप में पहचान एवं दर्जा दिए जाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि प्रशिक्षण और स्पष्ट कार्यक्षेत्र निर्धारित होने से स्वास्थ्य सेवकों की भूमिका को लेकर स्थिति अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
ज्ञापन में रखी गई सात प्रमुख मांगें
पहली मांग के तहत ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को समय-समय पर उनकी योग्यता के अनुरूप प्रशिक्षण देने की मांग की गई है, ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक कुशलता से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
दूसरी मांग में प्रशिक्षित ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को प्राथमिक उपचार की भूमिका प्रदान करने तथा आवश्यक व्यवस्था विकसित करते हुए उन्हें रेफरल सेंटर प्रणाली से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है। एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर आवश्यक व्यवस्था विकसित करने की बात भी कही है।
तीसरी मांग में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को “झोलाछाप डॉक्टर” के नाम से संबोधित कर अपमानित न किए जाने और उन्हें उचित पहचान एवं दर्जा दिए जाने का अनुरोध किया गया है।
चौथी मांग में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को टीबी उन्मूलन, इंद्रधनुष जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय महामारियों के दौरान प्रशिक्षित स्वयंसेवक के रूप में कार्य करने का अवसर देने की मांग की गई है।
पांचवीं मांग में प्रधानमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण की तर्ज पर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि इससे बिना उचित प्रशिक्षण के लोगों के स्वास्थ्य सेवाओं में आने पर भी रोक लगाई जा सकेगी।
छठी मांग में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों की योग्यता के अनुसार स्वास्थ्य सेवा से संबंधित रोजगार अथवा रोजगारपरक अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है।
सातवीं मांग में प्राथमिक उपचार जैसे कार्यों के संबंध में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों के विरुद्ध दर्ज मामलों की पुनः समीक्षा कर उचित मामलों में कार्रवाई अथवा मुकदमों को वापस लेने पर विचार करने का अनुरोध किया गया है।
“व्यवस्था और प्रशिक्षण से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिल सकती है मजबूती”
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम त्रिपाठी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध मानव संसाधन को प्रशिक्षण, पंजीकरण और उचित सरकारी व्यवस्था के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सीमित होने की स्थिति में प्राथमिक स्तर पर काम करने वाले प्रशिक्षित स्वास्थ्य सेवकों की भूमिका को व्यवस्थित तरीके से निर्धारित करने पर सरकार, समाज और ग्रामीण जनता—तीनों को लाभ मिल सकता है।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से ज्ञापन में उल्लिखित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों के लिए प्रशिक्षण, पंजीकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुनील चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार रंजन, क्षेत्रीय अध्यक्ष गोरखपुर परिक्षेत्र डॉ. ध्रुव कुमार, मंडल अध्यक्ष बस्ती डॉ. लाल जी आजाद, जिला अध्यक्ष बस्ती डॉ. नन्द किशोर चौहान, जिला महासचिव मनीष तिवारी, जिला मंत्री अखिलेश दूबे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने भाग लिया।
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