कहीं अमेरिका तो नहीं रच रहा मोदी सरकार को गिराने की साजिश…?

जी.पी. दुबे
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मोदी सरकार को गिराने की साजिश तो नहीं रच रहा अमेरिका?

मोदी सरकार के खिलाफ केवल इंडी गठबंधन ही नहीं है बल्कि मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए कोशिश में जुटी है।
रूस के सरकारी मीडिया स्पूतनिक की रिपोर्ट के अनुसार पर्दे के पीछे से बड़े पैमाने पर सीआईए मोदी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार सीआईए , आंध्र प्रदेश के बैप्टिस्ट चर्च और विपक्षी नेताओं के संपर्क में है |
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की मदद से मोदी सरकार को गिराने की एक बड़ी साजिश जारी है |
इससे पहले बांग्लादेश सरकार को उखाड़ फेंकने का आरोप भी अमेरिका पर लग चुका है |
रूसी मीडिया ने अमेरिकी राजदूत और कुछ अधिकारियों द्वारा बार-बार भारत के विपक्षी नेताओं के साथ बैठक करने पर चिंता व्यक्त की है।
रूसी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए , जो विपक्षी नेताओं के साथ लगातार संपर्क में है और बहुत जल्द ही मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है |
अखिलेश यादव तथा ममता बनर्जी का बार-बार यह कहना कि मोदी सरकार गिरने वाली है इसी का एक हिस्सा हो सकता है
अमेरिकी महावाणिज्यदूत जेनिफर लार्सन ने हाल ही में हैदराबाद में ए आई एम एम आई नेता असदुद्दीन ओवैसी से मुलाकात की थी |
इससे पहले वह मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से भी मिली थीं |
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से भी मुलाकात की थी |
रिपोर्ट में कहा गया है कि लार्सन हैदराबाद में अमेरिकी मिशन संस्था का नेतृत्व कर रही हैं और इस संस्था के जरिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए बैप्टिस्ट चर्च की मदद लेने की कोशिश कर रही है।
स्पूतनिक की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीआईए विपक्ष के कुछ नेताओं के साथ लगातार संपर्क में है और मोदी सरकार के खिलाफ लोगों में अविश्वास पैदा करने के लिए परिस्थितियाँ पैदा करने की कोशिश कर रही है |
रिपोर्ट में कहा गया है कि सीआईए का पहला लक्ष्य चंद्रबाबू नायडू की मदद से उनका समर्थन वापस पाना है |बैप्टिस्ट चर्च के जरिए नायडू को अपने पाले में लाने की कोशिश की जा रही है |
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर नायडू समर्थन वापस लेने से हिचकिचाते हैं तो विपक्ष को इसके लिए अनुकूल माहौल बनाने का निर्देश दिया गया है।

रूसी मीडिया ने कहा है कि अमेरिकी महावाणिज्यदूत और राजनयिकों द्वारा विपक्षी नेताओं से मुलाकात चिंता का विषय है।
रूस का कहना है कि मोदी विरोधी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सोशल मीडिया हस्तियों, उद्योगपतियों और कलाकारों समेत कई लोगों को इस अभियान के लिए व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है |
रूस के स्पूतनिक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जुलाई 2024 में, अमेरिकी दूतावास ने भारत में ‘इन्फ्लुएंस टू इम्पैक्ट’ (प्रभाव डालने के लिए प्रभाव) नामक एक कार्यक्रम आयोजित किया था।
इस कार्यक्रम में अभिषेक बनर्जी को आमंत्रित किया गया था, जो कांग्रेस के प्रचारकों को बढ़ावा देते हैं और यूट्यूब के माध्यम से आधे सच फैलाकर मोदी सरकार के खिलाफ काम करते हैं |स्पूतनिक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में रहकर हिंदू त्योहारों, रीति-रिवाजों और देवी-देवताओं के खिलाफ बोलने वाले और भारत विरोधी रुख रखने वाले आरजे सैयमा को अमेरिकी दूतावास ने ‘समानता के राजदूत’ का खिताब देकर सम्मानित किया था |
स्पूतनिक का कहना है कि यह सब भारत के लोगों को मोदी सरकार के खिलाफ भड़काने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।

वही अपुष्ट खबरों के अनुसार भारत की जनता को जातियों में बांटने के लिए तथा आपस में लड़ाने के लिए विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल हो रहा है

यही कारण है कि राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव लगातार जातिगत जनगणना की बात कर रहे हैं

विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के भाषणों में जो तेवर दिखाई देता है, वह यह साबित करने के लिए इस तरह कहते हैं कि मोदी सरकार दबाव में काम कर रही है और जल्द ही गिरने वाली है, जिस किसी को यह पता ना चले कि इसके पीछे अमेरिका का या विदेशी हाथ है

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