कुकुरमुत्तों की तरह निकल आए हैं बाजार में नकली मिठाई बेचने वाले दुकानदार

जी.पी.दुबे
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नकली मिठाइयों का विशाल कारोबार

बस्ती 29 अक्टूबर 24.
धनतेरस से आज दीपावली की शुरुआत हो चुकी है, बाजार पूरी तरह सज चुके हैं, इसके साथ ही शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक नकली मिठाइयां बेचने वालों की दुकान भी सज गई हैं |

यहां सबसे खास बात यह है कि परंपरागत दुकान जो बराबर चल रही हैं उन पर भी 50 प्रतिशत मिठाइयां नकली और जो उनका स्वयं का बनाया हुआ है वह भी गुणवत्ता विहीन |

शहर से लेकर गांव तक मिठाई की दुकान लगाने वालों की तीन कैटेगरी होती है.
👉 एक वह पूरे वर्ष अपनी मिठाई की दुकान पर अपने यहां खुद का बनाया हुआ बेचते हैं..

👉 दूसरे दुकानदार वह होते हैं जो रेडीमेड मिठाइयां खरीद कर बेचते हैं उनका अपना खुद का मिठाई बनाने की व्यवस्था नहीं होती..

👉 तीसरे वह दुकानदार हैं जो पूरे वर्ष किसी और चीज का बिजनेस करते हैं लेकिन दीपावली और रक्षाबंधन पर नकली मिठाइयां बनाने वाले लोगों से मिठाइयां खरीद कर बेचते हैं और अच्छा मुनाफा कमाते हैं बची हुई मिठाइयां वह जहां से लेते हैं वहीं वापस कर देते हैं..

जिले के नामी मिठाई बेचने वालों की दुकानों पर इन त्योहारों में कम गुणवत्ता वाली मिठाइयां महंगे रेट पर बिकती है और लोग दुकान के बैनर के नाम पर ज्यादा पैसे देकर खरीदतें हैं |

नकली मिठाइयां देखने में चमकदार दिखाई देती है जिससे भोले भाले ग्राहक उन मिठाइयों को अच्छा समझ खरीद लेते हैं | जो बाद में फूड प्वाइजनिंग का कारण बन खाने वाले को बीमार कर देती हैं |

ग्राहकों को दीपावली, रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर एक या दो दिन के लिए कुकुरमुत्ता की तरह सजी उन दुकानों से जिन्हे मिठाई के कारोबार का बाकी दिनों में कोई मतलब नहीं रहता उन दुकानों से मिठाइयां नहीं खरीदनी चाहिए |

क्योंकि ऐसे दुकानदार नकली मिठाई बनाने का कारोबार करने वालों से सस्ते रेट पर मिठाई खरीद कर अच्छा मुनाफा कमाते हैं उनको ग्राहक के स्वास्थ्य से कोई लेना-देना नहीं होता |

जब भी मिठाई खरीदने जाएं तो भरोसेमंद और साल के पूरे 365 दिन जिनका कारोबार मिठाई का हो उसी से मिठाई खरीदें |

चमकीली और कलर वाली मिठाइयां ना खरीदें..

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