

भारतीय नस्ल की गाय 40 करोड़ में बिकी, दुनिया भर में मची सनसनी
ब्राजील, 5 फरवरी 2025।
एक गाय की कीमत 40 करोड़ रुपये? सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन ब्राजील में हाल ही में हुए एक पशु मेले में भारतीय नस्ल की वियाटिना-19 नाम की गाय को इतनी ऊंची कीमत पर खरीदा गया। यह अब तक किसी भी गाय के लिए लगी सबसे महंगी बोली है, जिसने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी जगह बना ली है।
क्या खास है इस गाय में?
नेल्लोर नस्ल की इस गाय की सबसे बड़ी खासियत इसका शानदार शरीर, मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता और गर्म इलाकों में भी बेहतरीन सहनशक्ति है। इस गाय का वजन 1101 किलो है, जो इस नस्ल की अन्य गायों से लगभग दोगुना है। यही वजह है कि जब इसे बिक्री के लिए पेश किया गया, तो खरीदारों के बीच इसे पाने की होड़ लग गई।
क्यों है नेल्लोर नस्ल की गायों की इतनी मांग?
नेल्लोर नस्ल, जिसे ऑन्गोल ब्रीड के नाम से भी जाना जाता है, मूल रूप से भारत के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पाई जाती है। ये गायें बेहद कठिन और गर्म परिस्थितियों में भी जी सकती हैं और उनकी दूध देने की क्षमता प्रभावित नहीं होती। आमतौर पर अत्यधिक गर्मी में अन्य गायों का दूध उत्पादन कम हो जाता है, लेकिन नेल्लोर नस्ल की गायें इस चुनौती से पार पा लेती हैं।
कम देखभाल में भी बेहतरीन परफॉर्मेंस
इन गायों का सफेद फर और कंधे पर ऊँचा कूबड़ (हंप) होता है, जिससे वे लंबे समय तक पानी और पोषण संचित कर सकती हैं—कुछ हद तक ऊंटों की तरह। यही वजह है कि रेगिस्तानी और गर्म इलाकों में भी ये आसानी से रह सकती हैं। इनके शरीर में फैट स्टोरेज की क्षमता होती है, जिससे ये कठिन परिस्थितियों में भी बिना अधिक चारा-पानी के टिक सकती हैं।
नेल्लोर नस्ल की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है?
- शानदार रोग प्रतिरोधक क्षमता – इन्हें बीमारियां कम होती हैं, जिससे मेडिकल केयर की जरूरत बहुत कम पड़ती है।
- भीषण गर्मी में भी अनुकूलन क्षमता – दूध उत्पादन पर तापमान का प्रभाव नहीं पड़ता।
- कम संसाधनों में सर्वाइव करने की क्षमता – अन्य गायों की तुलना में बेहद कम देखभाल में भी ये स्वस्थ रहती हैं।
- तेजी से बढ़ती मांग – दुनिया भर में पशुपालक इस नस्ल की गायें पालना चाहते हैं।
ब्राजील में क्यों है इतनी ज्यादा डिमांड?
भारत की इस गाय का प्रभाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। ब्राजील में वर्ष 1800 से ही नेल्लोर नस्ल की गायों का पालन किया जा रहा है। वहां बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल होता है, क्योंकि ये कम खर्च में बेहतर उत्पादन देने वाली नस्ल है।
भारतीय नस्लों की बढ़ती लोकप्रियता
नेल्लोर के अलावा साहीवाल, पेंगनूर और बदरी नस्लों की गायें भी भारत समेत दुनिया के कई देशों में खूब पसंद की जा रही हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय पशुधन की गुणवत्ता और क्षमता को अब वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है।
40 करोड़ रुपये की बोली ने साबित कर दिया कि भारतीय नस्ल की गायों की कीमत अब सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावसायिक स्तर पर भी आसमान छू रही है। पशुपालन के क्षेत्र में यह एक नया अध्याय है, जो भारतीय नस्लों को दुनिया भर में नई पहचान दिला रहा है।
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