टेंडर घोटाला: बड़े अधिकारियों के पास ही सिमटी अर्थव्यवस्था की सच्चाई, नोट गिनने के लिए ई डी ने मंगाई मशीन

बिहार में टेंडर घोटाला: बड़े अधिकारियों के पास ही सिमटी अर्थव्यवस्था की सच्चाई

पटना 27 मार्च 25.

पटना में टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। बिहार भवन निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर तारिणी दास के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये बरामद किए गए। बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी रकम मिली कि उसकी गिनती के लिए नोट गिनने की मशीन मंगानी पड़ी। पटना के अनीसाबाद स्थित पूर्णेदु नगर समेत छह से सात ठिकानों पर छापेमारी जारी है। आरोप है कि तारिणी दास ठेकेदारों को टेंडर मैनेज कराने में मदद करते थे और इसके बदले मोटी रकम वसूलते थे।

IAS संजीव हंस से जुड़ा मामला, बढ़ती गई काली कमाई

यह पूरा मामला सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस से जुड़ा हुआ है, जिन्हें पांच महीने पहले मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया गया था। इस केस में पूर्व विधायक गुलाब यादव की गिरफ्तारी भी दिल्ली के एक रिसॉर्ट से हुई थी। गौरतलब है कि IAS संजीव हंस और पूर्व विधायक गुलाब यादव पर लगे गैंगरेप के आरोप की जांच के दौरान पटना पुलिस को काली कमाई के कई अहम सबूत मिले थे। इन साक्ष्यों को विजिलेंस विभाग को सौंपा गया, जिसके बाद इस पूरे घोटाले की परतें खुलने लगीं और ED की जांच तेज हो गई।

भारत की अर्थव्यवस्था का पैसा कहां जा रहा है?

बिहार के इस टेंडर घोटाले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भारत की अर्थव्यवस्था का अधिकांश पैसा आखिर कहां जा रहा है? आम जनता टैक्स चुकाती है, सरकारें योजनाएं बनाती हैं, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा सत्ता के करीबी अधिकारियों और नेताओं की जेब में चला जाता है। ठेके, ट्रांसफर-पोस्टिंग, कमीशनखोरी और घूसखोरी के जरिये सरकारी अधिकारियों ने अकूत संपत्ति बना ली है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े अधिकारी पर भ्रष्टाचार के इतने गंभीर आरोप लगे हैं। बिहार ही नहीं, देश के लगभग हर राज्य में सरकारी तंत्र के बड़े अधिकारी देश की आर्थिक नीतियों से ज्यादा अपने बैंक बैलेंस बढ़ाने में व्यस्त हैं। चाहे मनी लॉन्ड्रिंग हो, टेंडर घोटाला हो या फिर अन्य वित्तीय अपराध—हर जगह कुछ चुनिंदा अधिकारी ही काली कमाई के असली मालिक बनकर उभरते हैं।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

ED की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राजद (RJD) विधायक राकेश रौशन ने इसे बिहार सरकार के भ्रष्टाचार का नमूना बताया। उन्होंने कहा, “नीतीश सरकार में अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है। ट्रांसफर-पोस्टिंग में पैसा लिया जा रहा है।” वहीं, बीजेपी विधायक लखेंद्र पासवान ने सरकार का बचाव करते हुए कहा, “बिहार में सुशासन की सरकार है। गलत करने वालों पर कार्रवाई हो रही है, न किसी को फंसाया जा रहा है, न बचाया जा रहा है।”

भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी?

बिहार में उजागर हुआ यह टेंडर घोटाला सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह सत्ता के गलियारों में पैसे का खेल चलता है। आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई से सरकार को टैक्स देता है, लेकिन यही पैसा अफसरशाही के भ्रष्टाचार में डूब जाता है।

इस मामले की जांच जारी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ कुछ अधिकारियों और नेताओं की गिरफ्तारी से देश में सिस्टम सुधर जाएगा? या फिर यह भ्रष्टाचार की सिर्फ एक और परत हटने का मामला है, जिसके नीचे नए चेहरे आकर बैठ जाएंगे?

NGV PRAKASH NEWS

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