प्यार में पड़े एस आई नें करोड़ों का गबन कर महिला ऑफिसर को लेकर हुआ फरार

दिल्ली पुलिस का ‘लव स्कैंडल’: साइबर ठगी के करोड़ों लेकर फरार हुए SI और महिला पुलिसकर्मी

पूर्वी दिल्ली। प्यार और मोहब्बत की कहानियाँ फिल्मों का फेवरेट सब्जेक्ट रही हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस के इस वाकये ने हकीकत में एक ऐसी कहानी को जन्म दिया है, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। यहाँ दो पुलिसकर्मियों की मोहब्बत उन्हें अपराध की राह पर ले गई।

उत्तर-पूर्वी जिले के साइबर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर (SI) अंकुर मलिक करोड़ों की साइबर ठगी कर जीटीबी एन्क्लेव थाने में तैनात एक महिला एसआई के साथ फरार हो गया। पुलिस को इस मामले की जांच करते हुए 10 दिन से अधिक हो गए हैं, लेकिन दोनों अभी भी फरार हैं।

दोनों पुलिसकर्मी निलंबित, छापेमारी जारी

दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपित पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। पुलिस इनकी तलाश में राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में छापेमारी कर रही है।

अंकुर मलिक: एक पुलिसकर्मी से अपराधी बनने की कहानी

बागपत निवासी अंकुर मलिक वर्ष 2012 में दिल्ली पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था और 2021 में प्रमोशन पाकर एसआई बना। मार्च 2024 में उसकी पोस्टिंग उत्तर-पूर्वी जिले के साइबर सेल थाने में हुई। अंकुर विवेक विहार थाना क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था। उसका परिवार बागपत में रहता है, जिसमें पत्नी और एक बच्चा शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, उसकी पत्नी लकवा ग्रस्त है।

ट्रेनिंग के दौरान ही अंकुर की मुलाकात बागपत की रहने वाली एक महिला पुलिसकर्मी से हुई थी। दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती गई और बाद में यह रिश्ता आगे बढ़ गया।

महिला एसआई की शादी और अनबन

महिला एसआई की तैनाती जीटीबी एन्क्लेव थाने में थी। दिसंबर 2024 में उसकी शादी मंडोली जेल में सहायक अधीक्षक के पद पर कार्यरत एक अधिकारी से हुई थी। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, शादी के कुछ ही महीनों में दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई थी। इस तनाव के बीच अंकुर और महिला एसआई का रिश्ता और गहरा हो गया।

अंकुर मलिक की ‘गायब होने’ की कहानी

17 मार्च को अंकुर मलिक ने सात दिन का मेडिकल अवकाश लिया। 24 मार्च को उसे ड्यूटी पर लौटना था, लेकिन जब वह हाजिर नहीं हुआ तो सहकर्मियों ने उसे कॉल किया, लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ मिला। इसके बाद उसे थाने से गैरहाजिर घोषित कर दिया गया।

27 मार्च को अंकुर के परिजनों ने विवेक विहार थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करवाई। इसी दौरान पुलिस को शक हुआ कि अंकुर साइबर ठगी में लिप्त था।

साइबर ठगी में गड़बड़ियों का पर्दाफाश

पुलिस जांच में पता चला कि एसआई अंकुर मलिक जिन साइबर ठगी के मामलों की जांच कर रहा था, उनमें कई अनियमितताएँ पाई गईं। जांच के दौरान यह सामने आया कि तीन अलग-अलग बैंक खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।

एसआई अंकुर ने इन खातों को फ्रीज करवा दिया था, लेकिन बाद में उसने कोर्ट से अनुमति लेकर करीब 50 लाख रुपये तीन अन्य खातों में ट्रांसफर करवा दिए। इनमें से एक खाता शादाब नाम के युवक का था।

महिला एसआई भी शक के घेरे में

अंकुर मलिक के खिलाफ साइबर थाने में ही धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में तीन अलग-अलग केस दर्ज किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि उसकी करीबी महिला एसआई भी फरार है। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट जीटीबी एन्क्लेव थाने में दर्ज करवाई गई है। उसका फोन भी लगातार बंद आ रहा है।

दिल्ली पुलिस को इस बात के भी सबूत मिले हैं कि महिला एसआई के सैलरी अकाउंट में करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह पैसे कहां से आए और किस मकसद से ट्रांसफर किए गए।

पुलिस की कोशिशें जारी

फरार पुलिसकर्मियों की तलाश में दिल्ली पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। राजस्थान, उत्तराखंड और बागपत में संभावित ठिकानों पर रेड डाली जा रही है।

इस पूरे मामले ने दिल्ली पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। विभाग के लिए यह एक बड़ा झटका है कि खुद उनके अधिकारी अपराध में लिप्त पाए गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गड़बड़ी में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।

NGV PRAKASH NEWS

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