
शासकीय कॉलेज में महिला क्रीड़ा अधिकारी के साथ शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न: पीड़िता ने मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा सचिव से की न्याय की मांग
मेघा तिवारी की विशेष रिपोर्ट, रायपुर (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िले के रामानुजगंज स्थित शासकीय लरंग साय पीजी कॉलेज में कार्यरत महिला क्रीड़ा अधिकारी उर्मिला देवी लहरे ने महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्या रोज लिली बड़ा और सहायक प्रोफेसर रमेश खैरवार पर गंभीर मानसिक उत्पीड़न और अमानवीय व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इस मामले में पीड़िता ने मुख्यमंत्री कार्यालय, उच्च शिक्षा विभाग, एवं अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है।
शारीरिक बनावट और पहनावे पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ
शिकायत में महिला क्रीड़ा अधिकारी ने लिखा है कि कॉलेज की प्रभारी प्राचार्या उनके शरीर, पहनावे और निजी जीवन पर सार्वजनिक रूप से अशोभनीय टिप्पणियाँ करती हैं, जिससे उनके आत्मसम्मान को गहरा ठेस पहुंचता है। इतना ही नहीं, उनका नाम जानबूझकर किसी अन्य पुरुष से जोड़कर सामाजिक मान-सम्मान को ठेस पहुँचाई जा रही है।
पेशेवर गरिमा पर हमला, वेतन कटौती व प्रताड़ना
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि हस्ताक्षर और वेतन प्रक्रिया के दौरान केवल उन्हें ही जानबूझकर प्रताड़ित किया जाता है। प्रभारी प्राचार्या और उनके सहयोगी रमेश खैरवार हर छोटी बात को लेकर टोकते हैं, पूछताछ करते हैं, और अनावश्यक नियमों का हवाला देकर उनके वेतन में कटौती करते हैं। अन्य कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता, जिससे साफ़ तौर पर पक्षपात स्पष्ट होता है।
नौकरों जैसा व्यवहार और धमकी
महिला क्रीड़ा अधिकारी का कहना है कि उन्हें अपने ही विभाग में निजी नौकर की तरह ट्रीट किया जाता है। जब उन्होंने विरोध किया, तो न केवल उन्हें चुप कराने की कोशिश की गई, बल्कि 8 अप्रैल 2025 को बिना किसी पूर्व सूचना के उनके केबिन को खाली कराया गया, किताबें और व्यक्तिगत सामग्री बाहर फिंकवायी गई।
प्रतिशोध की भावना से धमकियाँ
पीड़िता का आरोप है कि जब उन्होंने इसका कारण जानना चाहा, तो प्राचार्या ने सार्वजनिक रूप से उन्हें धमकियाँ दीं—”रिकॉर्ड खराब कर दूंगी”, “तुम्हें कहीं पढ़ाने लायक नहीं छोड़ूंगी”, और “तुम्हें जेल भिजवा दूंगी” जैसी बातें कही गईं।
संविधान और POSH अधिनियम का उल्लंघन
महिला क्रीड़ा अधिकारी ने शिकायत पत्र में यह भी लिखा कि यह पूरा व्यवहार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और POSH अधिनियम, 2013 के अंतर्गत एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि मानसिक और शारीरिक रूप से वे गहरे तनाव और अपूरणीय नुकसान से गुजर रही हैं।
प्राचार्या का खंडन
प्रभारी प्राचार्या रोज लिली बड़ा ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि कॉलेज के अन्य स्टाफ व विद्यार्थी भी आरोपों को असत्य बता रहे हैं।
लेकिन सवाल अब भी यही है—यदि एक महिला अधिकारी को ही संस्थान में सुरक्षित माहौल नहीं मिल पा रहा है, तो यह शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है। ज़रूरी है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत दंडित किया जाए।
NGV PRAKASH NEWS

