
बस्ती: वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज कैली में मरीजों के लिए लगा आरओ सिस्टम शाम 7 बजे के बाद बंद, गर्मी में रातभर तरसते हैं तीमारदार और मरीज
बस्ती, 18 मई 2025 | NGV PRAKASH NEWS
बस्ती जिले के वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज, कैली में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को इस भीषण गर्मी में पीने के पानी की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज परिसर में शुद्ध पेयजल की सुविधा के लिए लगाए गए आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) सिस्टम को लेकर एक गंभीर लापरवाही सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में स्थापित आरओ सिस्टम शाम 7 बजे के बाद बंद कर दिया जाता है। इसके बाद से पूरी रात मरीज और उनके तीमारदार शुद्ध पानी के लिए परेशान होते रहते हैं। गर्मी के इस मौसम में जहां पानी एक बुनियादी आवश्यकता है, वहीं यह व्यवस्था मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करती प्रतीत हो रही है।
मरीजों और तीमारदारों का दर्द
कॉलेज में भर्ती एक मरीज के परिजन ने बताया,
“शाम के बाद आरओ बंद हो जाता है। थके-हारे तीमारदार पानी के लिए इधर-उधर भटकते हैं। कई बार मजबूरी में बाहर से पानी खरीदना पड़ता है, लेकिन हर किसी के पास पैसे नहीं होते।”
एक अन्य तीमारदार ने कहा,
“गर्मी के मारे मरीज का गला सूख रहा था, लेकिन नल में पानी नहीं था।
प्रशासन की उदासीनता
इस गंभीर समस्या को लेकर जब स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, तो उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला। न तो आरओ की समय सीमा बढ़ाई गई, न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
यह स्थिति दर्शाती है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की संवेदनहीनता कितनी गहरी है। एक ओर सरकार मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की बात करती है, दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और जिला प्रशासन से सवाल
अब यह सवाल उठता है कि क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस अनदेखी पर कोई कार्रवाई करेगा? क्या मरीजों को रातभर शुद्ध पानी के लिए तरसने से राहत मिलेगी?
समय रहते अगर यह समस्या नहीं सुलझाई गई, तो यह किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा को भी जन्म दे सकती है, खासकर मौजूदा गर्मी के मौसम में जब डिहाइड्रेशन और लू जैसी समस्याएं आम हैं।
NGV PRAKASH NEWS जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से अपील करता है कि इस गंभीर मामले में त्वरित संज्ञान लें और शुद्ध पेयजल की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करें। यह केवल एक व्यवस्था की बात नहीं है, बल्कि इंसानियत और मरीजों के अधिकारों का सवाल है।

