सड़क तड़पते रहे भाई -बहन :लोग बनाते रहे वीडियो


कल्याणपुर हादसा: सड़क पर तड़पती रही ज़िंदगी, राहगीरों ने सिर्फ वीडियो बनाए – एक दर्दनाक कहानी

कानपुर के कल्याणपुर में बुधवार तड़के हुए सड़क हादसे ने एक बार फिर मानवता को कटघरे में खड़ा कर दिया। स्कूटी से परीक्षा देने जा रही 19 वर्षीय नर्सिंग छात्रा अलशिफा और उसका 15 वर्षीय भाई तौहिद तकरीबन 40 मिनट तक सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन राहगीरों की संवेदनहीनता ने उनकी ज़िंदगी को आखिरी सांस तक अकेला छोड़ दिया।

घटना के मुताबिक, अलशिफा अपने छोटे भाई तौहिद के साथ कल्याणपुर स्टेशन जा रही थी। सुबह करीब 5:15 बजे केस्को सब स्टेशन के पास एक तेज रफ्तार लोडर ने स्कूटी को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों भाई-बहन उछलकर सड़क पर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। लोडर चालक मौके से फरार हो गया।

दर्दनाक दृश्य यह था कि हादसे के बाद दोनों भाई-बहन सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन किसी भी राहगीर ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की बजाय वीडियो बनाना ज्यादा ज़रूरी समझा। महज़ 100 कदम की दूरी पर दो नर्सिंग होम थे, लेकिन किसी ने भी उन्हें वहां ले जाने की जहमत नहीं उठाई। आसपास के केशवपुरम, सत्यम विहार और आवास विकास जैसे इलाकों के लोग भी उस समय मॉर्निंग वॉक पर निकले हुए थे, मगर किसी ने एंबुलेंस या पुलिस को फोन करना भी ज़रूरी नहीं समझा।

करीब 40 मिनट बाद, पुलिस और एंबुलेंस पहुंची। जब तक घायलों को सीएचसी कल्याणपुर पहुंचाया गया, तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। यह हादसा न केवल सड़क सुरक्षा के नियमों की अनदेखी का परिणाम है, बल्कि समाज की उस चुप्पी और संवेदनहीनता का भी आईना है, जो पीड़ित की मदद करने के बजाय मूकदर्शक बनी रहती है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मसवानपुर निवासी साइकिल व्यापारी मो. शकील की बेटी अलशिफा बिल्हौर के आरौल स्थित एक निजी कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की छात्रा थी। बुधवार को उसकी परीक्षा थी। दो दिन पहले ही पिता बेटी को लेकर राजस्थान के फतेहपुर से लौटे थे। परीक्षा की तैयारी के चलते अलशिफा सुबह तड़के भाई तौहिद के साथ स्टेशन के लिए निकली थी।

जैसे ही हादसे की खबर घर पहुंची, मां खुशनुमा बानो और बहनें कशिश, एलिस और मंतशा का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पोस्टमार्टम के बाद जब दोपहर करीब एक बजे दोनों के शव घर पहुंचे, तो पूरे मोहल्ले में मातम पसर गया। मां बेसुध होकर यही कहती रहीं, “मेरा घर उजड़ गया, बेटा चला गया, बेटी चली गई… अब किसके सहारे जिएंगे?” बहन कशिश अपनी अप्पी से लिपटकर बिलख पड़ी। इस मंजर ने हर किसी की आंखों को नम कर दिया।

सवाल जो समाज से पूछे जाने चाहिए
यह हादसा कई सवाल खड़े करता है। पहला – क्या सड़क पर पड़े किसी घायल की मदद करना अब हमारी जिम्मेदारी नहीं रही? दूसरा – क्या वीडियो बनाने की सनक ने हमारी मानवीय संवेदनाओं को निगल लिया है? तीसरा – प्रशासन और आम लोगों के बीच जागरूकता की कमी कब तक इस तरह की दर्दनाक मौतों का कारण बनती रहेगी?

कानून कहता है कि “गुड सेमेरिटन” (Good Samaritan) कानून के तहत किसी घायल की मदद करने वाले व्यक्ति से पुलिस या अस्पताल कोई सवाल नहीं करेगा। बावजूद इसके, लोग मदद करने से कतराते हैं। इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जागरूकता की कमी और संवेदनहीनता का घातक मेल जानलेवा साबित हो सकता है।

एसीपी कल्याणपुर अभिषेक पांडेय ने कहा है कि पीड़ित पक्ष की ओर से तहरीर मिलते ही मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। लोडर चालक की गिरफ्तारी और सख्त सजा सुनिश्चित करने की भी बात कही जा रही है।

अलशिफा का सपना, जो अधूरा रह गया
अलशिफा की तमन्ना थी कि वह नर्स बनकर समाज की सेवा करेगी, अपने परिवार का नाम रोशन करेगी। लेकिन एक बेकाबू लोडर और समाज की बेरुखी ने उसकी तमन्ना को अधूरा छोड़ दिया।

यह हादसा हम सबको यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम इतने संवेदनहीन हो चुके हैं कि किसी घायल की तड़पती ज़िंदगी की कीमत भी नहीं समझते? क्या सड़क हादसे के बाद हमारी पहली जिम्मेदारी घायल को अस्पताल पहुंचाना नहीं होनी चाहिए?

आज ज़रूरत है कि हम “वीडियो” से पहले “संवेदना” को प्राथमिकता दें। ताकि अगली बार कोई भाई-बहन सड़क पर दम तोड़ने से पहले किसी की मदद से बच जाए।

NGV PRAKASH NEWS


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