
बदायूं में पुलिसिया मनमानी का पर्दाफाश, कोर्ट ने 25 पुलिसकर्मियों पर दर्ज करने का आदेश दिया मुकदमा
बदायूं, 31 मई 2025।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में फर्जी गिरफ्तारी के एक सनसनीखेज मामले ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए बिनावर थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कांत कुमार शर्मा समेत 25 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर जांच कराने का आदेश दिया है। यह फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद तौसीफ रजा ने अधिवक्ता मोहम्मद तस्लीम गाजी की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।
दरअसल, 28 जुलाई 2024 की रात को गांव कुतुबपुर के रहने वाले मुख्तियार पुत्र निजामुद्दीन, बिलाल, अजीत, अशरफ और तनवीर को पुलिस ने बिना किसी एफआईआर के हिरासत में ले लिया था। इसके तीन दिन बाद, 31 जुलाई को पुलिस ने अचानक उन पर अफीम और डोडा रखने का आरोप लगाते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जेल भेज दिया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी की जानकारी 30 जुलाई को प्रेस नोट और सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक कर दी थी, जबकि एफआईआर अगले दिन 31 जुलाई को दर्ज की गई।
मामले की जांच जब अपर पुलिस अधीक्षक नगर ने की, तो इस गड़बड़ी की पुष्टि भी हो गई कि गिरफ्तारी 30 जुलाई को हुई थी और एफआईआर अगले दिन की गई। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी कांत कुमार शर्मा, एसओजी प्रभारी धर्मेंद्र सिंह सहित 25 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सीओ स्तर से विवेचना कराने का निर्देश दिया है।
जिन पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश हुआ है, उनमें शामिल हैं:
तत्कालीन थाना प्रभारी कांत कुमार शर्मा
एसओजी प्रभारी धर्मेंद्र सिंह
उप निरीक्षक गुड्डू सिंह, शेरपाल सिंह, सुम्मेर सिंह, रामनाथ कन्नौजिया
योगेश कुमार, सुमित कुमार, विकास कुमार, शैलेन्द्र गंगवार
मोहित कुमार, मनोज, चरन सिंह, नीरज कुमार मलिक
संजय सिंह, सचिन कुमार झा, विपिन कुमार, सचिन कुमार, मुकेश कुमार
सराफत हुसैन, आजाद कुमार, भूपेंद्र कुमार, कुश्कान्त, अरविन्द कशाना और मनीष कुमार।
यह आदेश पुलिसिया कार्रवाई की पारदर्शिता और जिम्मेदारी की जरूरत को फिर से रेखांकित करता है। इस मामले पर आगे की कार्यवाही पर नज़र बनी हुई है।
NGV PRAKASH NEWS

