
जयपुर: अपनी ही बेटियों का यौन शोषण करता रहा पिता, समाज के डर से मां रही खामोश – पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
बेटियों की चीखें दब गईं, मां की हिम्मत टूटी रही… अंत में पुलिस ने उठाया न्याय का जिम्मा
जयपुर, 27 जून 2025 | NGV PRAKASH NEWS
राजधानी जयपुर से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। सदर थाना क्षेत्र में एक पिता ने अपनी ही दो नाबालिग बेटियों के साथ लंबे समय तक यौन शोषण किया। बेटियों की उम्र महज 10 और 11 साल है। इस हैवान पिता की करतूतें तब उजागर हुईं जब एक एनजीओ ने पुलिस को इसकी जानकारी दी।
मासूम बेटियों की पीड़ा और मां की बेबसी
डीसीपी वेस्ट अमित कुमार के निर्देशन में मामले की जांच की गई। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी अक्सर शराब के नशे में अपनी पत्नी और बेटियों के साथ मारपीट करता था। वह न केवल पत्नी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था, बल्कि अपनी दोनों मासूम बेटियों के साथ बार-बार बलात्कार भी करता था।
बावजूद इसके, पीड़ित मां ने समाज की बदनामी, आर्थिक असुरक्षा और भविष्य के डर से कभी इसकी शिकायत नहीं की। वह डरी हुई थी — डर कि अगर पति जेल चला गया तो बेटियों का पेट कौन भरेगा, डर कि समाज उसे ही दोष देगा, और डर कि कहीं वह अकेली और असहाय न पड़ जाए।
अस्पताल से खुली पोल, पुलिस ने की हिम्मत
मां जब बेटियों को अक्सर पेट और कमर में दर्द की शिकायत के चलते अस्पताल ले जाती थी, तभी डॉक्टरों को कुछ संदेह हुआ। फिर 21 जून को एक एनजीओ के माध्यम से पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद डीसीपी अमित कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए योजना बनाई और कार्रवाई शुरू की।
चित्रकूट थाने की महिला एसएचओ और टीम ने बेटियों की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए महिला पुलिसकर्मियों की मदद से काउंसलिंग कराई, ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। काउंसलिंग के दौरान बेटियों ने जो कुछ भी बताया, वह किसी को भी झकझोर देने के लिए काफी था।
पुलिस ने खुद दर्ज कराया मुकदमा
चूंकि मां मुकदमा दर्ज कराने को तैयार नहीं थी, इसलिए पुलिस इंस्पेक्टर अंतिम शर्मा ने छिपे कैमरे के जरिए काउंसलिंग की प्रक्रिया रिकॉर्ड की और कानूनी तौर पर पुलिस ने स्वयं एफआईआर दर्ज की। मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सवाल बड़ा है: क्या सिर्फ गिरफ्तारी से न्याय हो जाएगा?
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आर्थिक रूप से असहाय महिलाओं को हम वह ताकत दे पाए हैं, जिससे वे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें? क्या समाज में अब भी बेटियों की चीखें डर और बदनामी के साए में दबती रहेंगी?
पुलिस की भूमिका निश्चित रूप से सराह

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