उत्तरकाशी में बादल फटने से मची भारी तबाही..

उत्तरकाशी में बादल फटने से भारी तबाही: निर्माणाधीन होटल साइट क्षतिग्रस्त, 9 मजदूर लापता, यमुनोत्री हाईवे का हिस्सा बहा

उत्तरकाशी, 29 जून 2025
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच उत्तरकाशी जिले में बादल फटने से भारी तबाही मच गई है। बड़कोट-यमुनोत्री मार्ग पर स्थित सिलाई बैंड के पास शनिवार देर रात करीब 3 बजे बादल फटने की घटना सामने आई, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। इस आपदा में निर्माणाधीन होटल साइट को भारी नुकसान पहुंचा है और वहीं कार्यरत कम से कम 9 मजदूर लापता बताए जा रहे हैं।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि होटल निर्माण स्थल के पास ही श्रमिकों का कैंप बना हुआ था, जिसमें करीब 19 मजदूर ठहरे हुए थे। इनमें से 9 मजदूर तेज बहाव और मलबे के साथ लापता हो गए। लापता लोगों की पहचान दूजे लाल (55), केवल थापा (43), रोशन चौधरी (40), विमला धामी (36), मनीष धामी (40), कालूराम चौधरी (55), बाबी (38) और प्रिंस (20) के रूप में हुई है।

यमुनोत्री हाइवे 10 मीटर तक बहा, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ रेस्क्यू में जुटी

बादल फटने के चलते करीब 10 मीटर लंबा हिस्सा यमुनोत्री हाइवे का बह गया है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। पुनर्निर्माण में समय लग सकता है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस व राजस्व विभाग की टीमें मौके पर राहत व बचाव कार्य में लगी हैं। अब तक कोई शव बरामद नहीं हुआ है। सर्च ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है।

अलकनंदा और मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर

उधर, रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद में बद्रीनाथ व केदारनाथ क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे न जाने और ऊंचाई वाली सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की है। तीर्थ यात्रियों को भी सचेत किया गया है।

राजमार्गों पर भूस्खलन, मलबा और यातायात बाधित

चमोली जिले में कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण राजमार्ग बंद हो गए हैं। कमेडा नंदप्रयाग, सिरोबगड़ सहित अन्य जगहों पर मलबा और पत्थरों के कारण मार्ग अवरुद्ध हैं। कार्यदायी संस्थाओं द्वारा सड़कें खोलने के प्रयास जारी हैं। पौड़ी गढ़वाल पुलिस ने सीमावर्ती क्षेत्रों में वाहनों को रोककर सावधानी बरती है और आवश्यक पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

प्राकृतिक आपदा से सतर्कता जरूरी

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के शुरुआती दिनों में ही जिस तरह की प्राकृतिक आपदाएं सामने आई हैं, वह प्रशासन और सरकार के लिए चिंता का विषय हैं। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्यों और तीर्थ यात्राओं के दौरान मौसम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बचाव और पुनर्निर्माण कार्य के लिए केंद्र और राज्य स्तर से आवश्यक मदद जुटाई जा रही है।

NGV PRAKASH NEWS

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