मानसून की बेरुखी और बिजली की समस्या नें किसानों के माथे पर उकेरी चिंता की लकीरें

Gyan Prakash Dubey

मानसून की बेरुखी और बिजली संकट ने बस्ती के किसानों की कमर तोड़ी, धान की रोपाई पर संकट के बादल

📍NGV PRAKASH NEWS | 8 जुलाई 2025 | बस्ती से विशेष रिपोर्ट

बस्ती, उत्तर प्रदेश — जुलाई की दस्तक के साथ ही जब खेतों में हरियाली की उम्मीदें पनपती हैं, इस बार बस्ती जिले के किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। 8 जुलाई बीत चुकी है, लेकिन अब तक जिले में मानसून की कोई ठोस बारिश नहीं हुई है। खेत सूखे हैं, रोपाई टल रही है और किसानों के माथे पर चिंता की सिलवटें बढ़ती जा रही हैं।

धान की फसल पर मंडरा रहा संकट
धान की फसल के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। लेकिन मानसून की बेरुखी ने सारा चक्र गड़बड़ा दिया है। जिले के किसान खेतों में तैयारी तो कर रहे हैं, मगर पानी के अभाव में पौध रोपना संभव नहीं हो पा रहा।
👉 जो किसान किसी तरह धान की रोपाई कर चुके हैं उनकी फसल खेत में सूख रही है | जिससे उनके माथे पर चिंता की लकीरें उभर गई है |

किसान बाबू राम कहते हैं, “इस समय तक हम लोग आधे खेतों में रोपाई कर चुके होते। लेकिन इस बार तो पौध सूखने लगी है। अगर अगले हफ्ते बारिश नहीं हुई तो धान की फसल का सपना अधूरा रह जाएगा।”

बिजली संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
बस्ती जिले में इन दिनों बिजली की आपूर्ति बेहद खराब स्थिति में है। गांवों को कुल 7 से 8 घंटे बिजली मिल रही है, वो भी दर्जनों बार टूट-फूट के साथ। खेतों की सिंचाई के लिए जो किसान पंप सहारा ले रहे हैं, वो भी बिजली की आंखमिचौली से परेशान हैं।

नगर क्षेत्र के एक किसान ने बताया, “बिजली आती है तो 5-10 मिनट में फिर चली जाती है। जब तक मोटर चलती है, पानी खेत तक पहुंचने भी नहीं पाता। खेती तो दूर, घर की रोशनी भी समय पर नहीं मिल रही।”

प्रशासन की तैयारी पर उठ रहे सवाल
प्रदेश सरकार ने हाल ही में मानसून की तैयारी और किसानों के लिए राहत की योजनाएं घोषित की थीं, मगर ज़मीनी हालात इसके उलट हैं। गांवों में न तो वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था है, न ही डीजल पर सब्सिडी की कोई स्पष्ट योजना।

क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ?
कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के एक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, “अगर जुलाई के दूसरे सप्ताह तक बारिश नहीं हुई, तो बस्ती जैसे क्षेत्रों में 30–40% तक धान की खेती प्रभावित हो सकती है। इससे अगली रबी फसल की तैयारी भी पिछड़ जाएगी।”

किसानों की मांग
किसानों ने प्रशासन और शासन से कुछ ठोस मांगें रखी हैं—

हर गांव में वैकल्पिक सिंचाई साधनों की व्यवस्था हो

डीजल पर तत्काल राहत दी जाए

बिजली आपूर्ति शेड्यूल तय कर नियमित की जाए

खेतों की निगरानी कर बीज और खाद की बर्बादी को रोका जाए


बस्ती जिले में मानसून की देरी और बिजली संकट ने किसानों को दोहरी मार दी है। सरकार को अब ‘फाइलों की तैयारी’ से निकलकर ‘मैदान की रणनीति’ पर आना होगा, वरना हालात हाथ से निकलने में देर नहीं लगेगी।

📌 रिपोर्ट: NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *