

हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुलिस अधीक्षक ने जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर थाना प्रभारी समेत पूरा थाना निलंबित
जौनपुर | 13 जुलाई 2025 | NGV PRAKASH NEWS
जौनपुर जिले में ग्राम समाज की ज़मीन पर अवैध कब्ज़े और पुलिस की संदिग्ध भूमिका को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जिले के पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। न्यायालय की कड़ी फटकार के बाद जौनपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ कुमार (आईपीएस, 2015 बैच) ने थाना मुंगराबादशाहपुर के प्रभारी निरीक्षक समेत लगभग 65 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मामला ग्राम गौरीशंकर सरोज द्वारा दायर की गई जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने ग्राम समाज की ज़मीन पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक उदासीनता की शिकायत की थी। आरोप है कि 17 मई 2025 को थाना मुंगराबादशाहपुर की पुलिस—जिनमें पंकज मौर्य और नीतीश गौड़ नामक सिपाही शामिल थे—ने शिकायतकर्ता को याचिका वापस लेने का दबाव बनाया। आरोप ये भी है कि पुलिस ने ₹2,000 की रंगदारी ली और शिकायतकर्ता के नाती को गिरफ्तार कर डराने की कोशिश की।
जब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर सख्त रुख अपनाते हुए एसपी डॉ. कौस्तुभ कुमार को तलब किया और जवाब मांगा। कोर्ट की सख्ती और न्यायिक निर्देशों का असर इतना गहरा हुआ कि एसपी ने बिना देर किए थाना प्रभारी दिलीप कुमार सिंह, आरोपी सिपाहियों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही शुरू कर दी। निलंबन के साथ ही उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल जिले के पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है, बल्कि न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी जनता का विश्वास और मजबूत किया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के गृह सचिव और जौनपुर एसपी से 15 जुलाई तक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश भी दिया है, ताकि पूरे घटनाक्रम का कानूनी मूल्यांकन किया जा सके।
गौरतलब है कि थाना मुंगराबादशाहपुर में एक पुलिस चौकी का उद्घाटन हाल ही में बड़े धूमधाम से हुआ था, लेकिन अब वही थाना न्यायिक निर्देशों के चलते सवालों के घेरे में है। यह कार्रवाई पूरे प्रदेश के पुलिस महकमे के लिए एक कड़ा संदेश है कि जनहित की आवाज़ को दबाने की कोशिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
NGV PRAKASH NEWS
न्याय के पक्ष में, जनहित की आवाज़ के साथ
