

“मित्रता, सेवा, सुरक्षा” को चरितार्थ करती देहरादून पुलिस: खोई हुई तीन बुजुर्ग महिलाएं सकुशल मिलीं अपने साथियों से
मेघा तिवारी की रिपोर्ट
ऋषिकेश (देहरादून), 19 जुलाई 2025
श्रावण माह में नीलकंठ दर्शन के लिए हरियाणा से ऋषिकेश पहुंचीं तीन बुजुर्ग महिलाएं उस वक्त घबरा गईं, जब वे भीड़भाड़ में अपने साथियों से बिछड़ गईं। नटराज चौक पर मायूस और असहाय स्थिति में घूमती इन महिलाओं को जब ऋषिकेश पुलिस की नजर पड़ी, तो “मित्रता, सेवा, सुरक्षा” का भाव वास्तव में जीवंत हो उठा।
तीनों महिलाएं — मेवा, बतासी और मिश्री — हरियाणा के नौरंगाबाद गुर्जरों की ढाणी तिलोडी गांव से अन्य 8 महिलाओं के साथ कांवड़ यात्रा पर आई थीं। नीलकंठ दर्शन के बाद लौटते समय भारी भीड़ और बुजुर्गावस्था के कारण वे अपनी टोली से बिछड़ गईं। न ही उनके पास मोबाइल नंबर था, न वाहन की जानकारी और न ही स्पष्ट पता। अनपढ़ होने के कारण वे किसी भी सटीक जानकारी को साझा नहीं कर पा रही थीं।
ऋषिकेश पुलिस की संवेदनशीलता यहीं से शुरू हुई।
नटराज चौक पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तीनों को प्रेमपूर्वक पास के पुलिस बूथ में बैठाया, पानी-जूस पिलाया और भरोसा दिलाया कि वे उन्हें उनके साथियों से मिलवाकर ही दम लेंगे। गांव का नाम सुनकर पुलिस टीम ने गूगल के माध्यम से संबंधित थाना और जिले की जानकारी प्राप्त की और फिर सरपंच से संपर्क किया।
सरपंच की मदद से वाहन चालक का मोबाइल नंबर मिला। जब ड्राइवर से बात की गई तो उसने बताया कि वे तीनों महिलाएं काफी देर से लापता थीं और पूरा समूह उन्हें ढूंढ रहा था। हालांकि वह सटीक लोकेशन नहीं बता सका, लेकिन आगे संपर्क कराने पर पता चला कि उनकी गाड़ी आईडीपीएल पार्किंग में खड़ी है।
फिर क्या था — ऋषिकेश पुलिस ने अपनी सरकारी गाड़ी से तीनों बुजुर्ग महिलाओं को आईडीपीएल पार्किंग ले जाकर सकुशल उनके साथियों से मिलवाया। इस भावुक मिलन के दौरान तीनों महिलाओं की आंखें नम थीं, लेकिन चेहरों पर संतोष और मुस्कान। उन्होंने पुलिसकर्मियों के सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद दिया और उत्तराखंड पुलिस की कार्यशैली की प्रशंसा की।
यह घटना न सिर्फ एक मानवीय पहलू को दर्शाती है, बल्कि उत्तराखंड पुलिस के संवेदनशील, तकनीकी रूप से सशक्त और नागरिकों के प्रति समर्पित रुख की सशक्त मिसाल भी बन गई है।
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