बस्ती में देह व्यापार का काला सच..

NGV PRAKASH NEWS की विशेष रिपोर्ट

बस्ती का काला सच: देह व्यापार का जाल, पुलिस की कार्यवाही और ‘सफेदपोश’ की छाया

बस्ती।
शहर और जिले का नाम एक बार फिर शर्मसार हुआ है। मंगलवार को हरैया थाना क्षेत्र में देह व्यापार के अड्डे का पर्दाफाश हुआ, जहां से तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले मड़वा नगर, बैरिअहवा इलाके में भी इसी तरह का अड्डा पकड़ा गया था।

उपरोक्त घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि बस्ती में जिस्मफरोशी का धंधा संगठित और योजनाबद्ध तरीके से चल रहा है।

क्षेत्राधिकारी रुधौली स्वर्णिमा सिंह, जो मिशन शक्ति की नोडल अधिकारी भी हैं, ने बताया कि इस पूरे सेक्स रैकेट की कड़ियां बलिया से लेकर लखनऊ तक फैली हुई हैं। पकड़ी गई युवतियां अलग-अलग जिलों से लाई गई थीं। और सबसे अहम बात—ये सभी अड्डे किराए के मकानों में चल रहे थे, जहां ऑनलाइन बुकिंग की जाती थी। ग्राहक समय और तारीख तय करता, फिर लखनऊ तक से लड़कियों को बुलाया जाता। उम्र और खूबसूरती के आधार पर रेट तय होते, जो 5,000 से लेकर 20,000 रुपये तक हो सकते थे।

‘सफेदपोश’ की परछाई और पुलिस की नाकामी
सूत्र बताते हैं कि इन अड्डों के ऊपर कुछ ऐसे ‘सफेदपोश’ लोगों का हाथ है, जिनकी पहुंच और प्रभाव इतना है कि इनके पकड़े जाने की संभावना बहुत कम रहती है। यही वजह है कि पुलिस कार्रवाई अक्सर किसी छोटे अड्डे तक ही सिमट कर रह जाती है।

👉मसाज सेंटर और हाईवे के ढाबों पर भी गंदा खेल
सूत्रों के अनुसार देह व्यापार केवल किराए के मकानों तक सीमित नहीं है। बस्ती के कई मसाज सेंटर मसाज की आड़ में यह गंदा कारोबार चला रहे हैं। वहीं, हाईवे के ढाबों पर भी रात-दिन महिलाओं और युवतियों की सप्लाई होती है। ट्रक ड्राइवर से लेकर राहगीर तक इनका इस्तेमाल करते हैं। यहां शामिल महिलाएं आसपास के गांवों और दूर-दराज के इलाकों से लाई जाती हैं।

सूत्रों के अनुसार मसाज सेंटर पर दरें 2,000 से 5,000 रुपये तक हैं, जबकि देह व्यापार के अड्डों पर यह रकम 20,000 रुपये तक पहुंच जाती है।

सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा शहर के कई मोहल्ले में भी दुकानों की आड़ में देह व्यापार का धंधा फल फूल रहा है |

पुलिस पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि शहर में पुलिस की नाक के नीचे यह कारोबार कैसे बेरोकटोक चल रहा है? क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर आंखें मूंद ली गई हैं? जब मड़वा नगर में पुलिस अधीक्षक अभिनंदन के निर्देश पर सीओ सदर सतेंद्र भूषण त्रिपाठी के नेतृत्व में कार्रवाई हुई थी, तब लगा था कि यह गंदा धंधा बंद होगा। लेकिन मामला ठंडा पड़ गया और बाकी अड्डे वैसे ही चल रहे हैं।

अब बस्ती के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि पुलिस अधीक्षक अभिनंदन, एएसपी ओम प्रकाश सिंह और सीओ रुधौली स्वर्णिमा सिंह की टीम इस धंधे की जड़ तक पहुंचेगी और उन ‘सफेदपोश’ चेहरों को भी बेनकाब करेगी, जो इस गंदे धंधे के असली संरक्षक हैं।

यह मामला केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज की आत्मा पर चोट है। बस्ती जैसे शहर में यदि देह व्यापार का इतना बड़ा नेटवर्क चल रहा है, तो यह हमारे सामाजिक ताने-बाने और कानून के प्रति विश्वास दोनों पर गहरी चोट है।

NGV PRAKASH NEWS


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