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ला-नीना इफेक्ट का असर: इस बार पड़ सकती है हाड़ कंपाने वाली ठंड, मौसम वैज्ञानिकों ने जारी किया अलर्ट
सितंबर 14, 2025। मौसम का मिजाज लगातार तल्ख होता जा रहा है। कभी झुलसाती गर्मी तो कभी लगातार बारिश, और अब सर्दियों के मौसम को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। वेदर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार ला-नीना इफेक्ट (La Niña Effect) की वजह से सर्दियां सामान्य से कहीं ज्यादा ठंडी पड़ सकती हैं।
पिछले दो सालों से तुलना
यहां बताते चलें कि 2023-24 में रिकॉर्डतोड़ कड़ाके की ठंड दर्ज की गई थी, लेकिन उसके बाद 2024-25 की सर्दियां अपेक्षाकृत कम ठंडी रहीं। हालांकि, मौजूदा मौसम पैटर्न को देखते हुए 2025-26 की सर्दियां फिर से कंपा देने वाली हो सकती हैं।
ला-नीना क्या है और भारत पर असर
ला-नीना, एल-नीनो–सदर्न ऑसीलेशन (ENSO) का ठंडा चरण है, जिसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र का सतही तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है। इसका असर केवल महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है।
- भारत में यह प्रायः सर्दियों को सामान्य से ठंडा कर देता है।
- उत्तर भारत और हिमालयी इलाकों में बर्फबारी और ठंडी हवाएं बढ़ जाती हैं।
- दक्षिण भारत में तापमान में गिरावट इतनी तेज नहीं होती, लेकिन उत्तरी हिस्से में सर्दी का असर ज्यादा दिखता है।
वैज्ञानिकों के ताजा अनुमान
- अमेरिकी नेशनल वेदर सर्विस के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (CPC) के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच ला-नीना के एक्टिव होने की 71% संभावना है।
- हालांकि, दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच यह संभावना घटकर 54% रह जाएगी, लेकिन “ला-नीना वॉच” प्रभावी बनी रहेगी।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक अधिकारी ने बताया कि, “भारत में ला-नीना अक्सर ठंडी सर्दियों से जुड़ा होता है। जलवायु परिवर्तन का असर इसे थोड़ा संतुलित कर सकता है, लेकिन सामान्य से ज्यादा ठंडी सर्दियों की संभावना है।”
स्काइमेट वेदर की चेतावनी
स्काइमेट वेदर के अध्यक्ष जी. पी. शर्मा के मुताबिक,
- प्रशांत महासागर का तापमान पहले से ही सामान्य से ठंडा है।
- अगर यह -0.5°C से नीचे चला जाए और लगातार तीन तिमाही तक बरकरार रहे तो ही इसे आधिकारिक तौर पर ला-नीना कहा जाएगा।
- भले ही यह मानक न पूरे हों, लेकिन मौजूदा ठंडा पड़ाव भी वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
- अमेरिका में ड्राई कोल्ड (सूखी ठंड) का असर दिखने की आशंका है, जबकि भारत में कड़ी ठंड और हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी देखने को मिल सकती है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती
मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज तापमान में लगातार वृद्धि कर रहा है, लेकिन साथ ही मौसमी उतार-चढ़ाव भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं।
- मानसून 2025 में पहले ही देशभर में जोरदार बारिश दर्ज की जा चुकी है।
- अब यदि ला-नीना सक्रिय होता है, तो 2025-26 की सर्दियां देश के कई हिस्सों में हाड़ कंपाने वाली साबित हो सकती हैं।
इस चेतावनी के बाद प्रशासन और आम जनता को अभी से तैयारी करनी होगी, ताकि ठंड के संभावित दुष्प्रभावों से बचा जा सके।
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