IIT कानपुर नें बनाई छोटी चिड़िया जो पंख फड़फड़ाकर भरेगी उड़ान

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IIT कानपुर ने बनाई पाँच इंच की ‘चिड़िया’ — पंख फड़फड़ाकर भरेगी उड़ान..

14 सितंबर 2025, कानपुर — भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के अनस्टडी एयरोडायनैमिक्स लैब ने एक रोमांचक स्वदेशी आविष्कार पेश किया — पंख फड़फड़ाकर उड़ने वाला ऑटोनॉमस ऑर्निथॉप्टर, जिसे टीम ने सजाकर और छोटा कर सबसे छोटे संस्करण में केवल पाँच इंच तक आकार दिया है। यह पक्षीनुमा ड्रोन अब सीमांत निगरानी और सर्विलांस के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) इनोवेशन समिट-2025 के अवसर पर शनिवार को IIT कानपुर में आयोजित प्रदर्शनी में यह तकनीक पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई गई। समारोह में शिक्षण संस्थान, उद्यमी, निवेशक और नीतिनिर्माता-विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया; 25 से अधिक GCC शाखाओं के प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे। समिट में स्टार्टअप्स ने स्मार्ट मीटर, चार्जिंग बैग, रोबोट और अन्य उभरती तकनीकों का भी प्रदर्शन किया।

अनस्टडी एयरोडायनैमिक्स टीम के शोधार्थी श्रमन दास ने बताया कि यह ऑर्निथॉप्टर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसमें धातु का प्रयोग न्यूनतम रखा गया है। श्रमन के अनुसार, छोटे आकार व हल्के निर्माण के कारण यह रडार-डिटेक्शन से बचने की क्षमता रखता है। टीम के प्रमुख प्रो. देवोपम दास के निर्देशन में बनाए गए विभिन्न आकारों में सबसे बड़े का पंख 1.6 मीटर तक है, जबकि सबसे छोटा मॉडल मात्र पाँच इंच का है।

तकनीकी विशेषताएँ:

  • वज़न और संरचना में धातु का न्यूनतम उपयोग, जिससे रडार पर पकड़ कम।
  • ज़्यादा समय तक उड़ान क्षमता: बड़े मॉडल लगभग एक घंटे तक 300–400 मीटर के क्षैतिज दायरे में सक्रिय रह सकते हैं।
  • ऊँचाई क्षमता: रिपोर्ट के अनुसार अधिकतम ~1 किमी ऊँचाई तक उड़ान संभव।
  • सर्विलांस के लिए मिनी कैमरा व सेंसर लगाया जा सकता है।
  • GPS आधारित स्वायत्त नियंत्रण प्रणाली, जो बिना पायलट के मिशन निर्धारण और नेविगेशन सुनिश्चित करती है।

समारोह के शुभारंभ में मुख्य अतिथियों के रूप में प्रमुख सचिव (योजना) आलोक कुमार, निवेश यूपी के सीईओ विजय किरन आनंद तथा संस्थान के उप-निदेशक बृजभूषण मौजूद रहे। उनके साथ कई निवेशक और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के प्रतिनिधियों ने भी इनोवेशन-परिचर्चा में भाग लिया।

IIT टीम का मानना है कि ऐसे ऑर्निथॉप्टर सीमा-सुरक्षा, अफरा-तफरी वाले इलाके में रेस्क्यू ऑपरेशन, जंगल और संरक्षित क्षेत्रों की निगरानी तथा संकुचित शहरी इलाकों में खुफिया निरीक्षण जैसे उपयोगों के लिए उपयुक्त होंगे। कम आवाज़, छोटे साइज और स्वायत्त नेविगेशन इन्हें पारंपरिक क्वाडकॉप्टर-ड्रोन की तुलना में गुप्त मिशनों के लिए उपयोगी बना सकते हैं।

विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया कि व्यावसायिक उत्पादन के स्तर पर पहुंचने के लिए बैटरी टेक्नोलॉजी, सेंसर-इंटीग्रेशन और miniaturization के साथ-साथ नियामक मानकों पर भी काम करना होगा। सुरक्षा एवं गोपनीयता से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए इन्हें आर्मी/पुलिस और नागरिक उपयोग के लिए परखा जाएगा।

IIT कानपुर की यह उपलब्धि देश में उभरती एयरोस्पेस और रॉबोटिक्स क्षमताओं का संकेत है — जहां अकादमिक शोध, स्टार्टअप इनोवेशन और उद्योग-निवेश का संगम टेक्नोलॉजी को व्यावहारिक रूप देने में मदद कर रहा है।

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