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“ब्रेन-ईटिंग अमीबा” से केरल में बढ़ी दहशत, जानें इसके लक्षण और बचाव
केरल, 17 सितंबर 2025।
भारत के केरल राज्य में इन दिनों एक दुर्लभ लेकिन घातक संक्रमण ने लोगों में खौफ पैदा कर दिया है। इसका नाम है Naegleria fowleri, जिसे आम भाषा में “ब्रेन-ईटिंग अमीबा” कहा जाता है। यह एक ऐसा सूक्ष्मजीव है जो गर्म, मीठे और स्थिर पानी में पनपता है और यदि नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश कर जाए तो यह सीधे दिमाग पर हमला करता है।
स्वास्थ्य विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस साल केरल में अब तक 67 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 18 लोगों की मौत हो चुकी है। हाल के दिनों में एक 17 वर्षीय छात्र और एक 9 साल की बच्ची की मौत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
क्या है ब्रेन-ईटिंग अमीबा?
- यह अमीबा झीलों, तालाबों, उथले नदी किनारों और गर्म पानी वाले स्विमिंग पूलों में पाया जाता है।
- संक्रमण तभी होता है जब पानी नाक के रास्ते दिमाग तक पहुँचता है।
- खास बात यह है कि इसे पीने से बीमारी नहीं फैलती।
चिकित्सक बताते हैं कि यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि कई बार शुरुआती पहचान भी मुश्किल हो जाती है, लेकिन एक बार दिमाग पर हमला शुरू हो जाए तो संक्रमण तेजी से फैलता है।
शुरुआती लक्षण (पहले 5 दिन)
- तेज सिरदर्द
- तेज बुखार
- मतली और उल्टी
- गर्दन में अकड़न
- थकान और कमजोरी
गंभीर लक्षण (5 दिन के बाद)
- दौरे पड़ना
- मानसिक भ्रम और असमंजस
- संतुलन खोना
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- कोमा में चले जाना
विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण के लक्षण प्रकट होने के 1 से 18 दिनों के भीतर मृत्यु हो सकती है। यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
- बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण पानी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे ऐसे अमीबा के पनपने की संभावना भी बढ़ जाती है।
- कई तालाब और झीलें बिना साफ-सफाई के इस्तेमाल हो रही हैं।
- स्विमिंग पूल की नियमित क्लोरीनेशन और फिल्ट्रेशन न होना भी खतरे को बढ़ाता है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
चूंकि इसका इलाज बेहद मुश्किल है और मृत्यु दर 97% से ज्यादा है, इसलिए बचाव ही सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।
- नाक बंद करके तैरें – स्विमिंग करते समय नाक क्लिप का इस्तेमाल करें।
- गोता लगाने से बचें – गर्म और स्थिर पानी वाली झीलों या तालाबों में डुबकी न लगाएं।
- उबला या फिल्टर्ड पानी ही नाक धोने में प्रयोग करें – नल का पानी सीधे इस्तेमाल न करें।
- स्विमिंग पूल की साफ-सफाई रखें – पूल का पानी हमेशा क्लोरीनेटेड और फिल्टर्ड होना चाहिए।
- गर्मी में सतर्क रहें – ऐसे मौसम में खासकर उथले और स्थिर जल स्रोतों में तैरने से बचें।
- लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें – शुरुआती इलाज ही जान बचा सकता है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियाँ
केरल स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्विमिंग पूलों, सार्वजनिक जल स्रोतों और घरों के पानी के टैंकों की सफाई और क्लोरीनेशन पर जोर दिया है। लोगों को चेतावनी दी गई है कि बिना सुरक्षित पानी के खुले स्रोतों में नहाने या तैरने से बचें।
विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी के चलते भविष्य में भारत के अन्य हिस्सों में भी ऐसे मामले देखने को मिल सकते हैं।
👉 निष्कर्ष यह है कि “ब्रेन-ईटिंग अमीबा” एक घातक लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी है। सतर्कता, साफ-सफाई और पानी के इस्तेमाल में सावधानी ही इसका सबसे बड़ा इलाज है।
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