यहां बनेगी पूर्वांचल की सबसे ऊंची 34 मंजिला बिल्डिंग..

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नोएडा और लखनऊ के बाद बनेगा ट्विन टावर


वाराणसी में बनेगी पूर्वांचल की सबसे ऊंची ग्रुप हाउसिंग बिल्डिंग, 34 मंजिला ट्विन टावर को मिला वीडीए की मंजूरी

वाराणसी।
विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही काशी ने मंगलवार को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। नोएडा और लखनऊ के बाद अब वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने पूर्वांचल की सबसे ऊंची ग्रुप हाउसिंग बिल्डिंग के नक्शे को मंजूरी दे दी है। यह बिल्डिंग वाराणसी-चंदौली मार्ग पर स्थित राल्हूपुर, कटेसर में बनाई जाएगी और इसकी ऊंचाई 112 मीटर होगी।

इस परियोजना का निर्माण जीत होम साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। बिल्डिंग में दो भूमिगत पार्किंग, तीन मंजिल व्यवसायिक गतिविधियों के लिए और 31 मंजिल आवासीय फ्लैटों के लिए बनाई जाएंगी। कुल मिलाकर यह 34 मंजिलों की शानदार ट्विन टावर बिल्डिंग होगी, जिसमें आधुनिक सुविधाओं से युक्त आलीशान आवास उपलब्ध होंगे।

9551 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट में 357 फ्लैट बनेंगे। पार्किंग की व्यवस्था में 489 कार और 51 दोपहिया वाहनों के लिए जगह रखी गई है। इस परियोजना से वीडीए को 6,94,91,568 रुपये की आय प्राप्त हुई है, जो अब तक की सबसे बड़ी समूह आवासीय परियोजनाओं में से एक है।

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने हाल ही में नए बायलाज में कई बदलाव किए हैं। एफएआर (Floor Area Ratio) में छूट देने और ऊंचाई की बाध्यता समाप्त करने से अब उसी भूमि पर अधिक मंजिलों का निर्माण संभव हो गया है। जहां पहले 28 मंजिल का नक्शा पास होता था, अब 34 मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई है। इससे आवासों की संख्या में भी वृद्धि हुई है और निर्माण लागत पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।

वीडीए के उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग ने बताया कि नए बायलाज के तहत ग्रुप हाउसिंग और होटल निर्माण को लेकर अधिक लचीले नियम बनाए गए हैं। इस समय चार ग्रुप हाउसिंग और 10 से अधिक होटल परियोजनाओं के मानचित्रों के आवेदन वीडीए में लंबित हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

कंपनी के निदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव जीत ने कहा कि एफएआर में दी गई छूट से फ्लैट की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण मिलेगा। इसके अलावा सरकार ने जीएसटी में भी छूट दी है, जिससे खरीदारों को राहत मिलेगी।

यह ट्विन टावर प्रोजेक्ट न सिर्फ वाराणसी में आवास की नई संभावनाओं को खोलेगा, बल्कि शहर के शहरी विकास को भी एक नई दिशा देगा। यह परियोजना काशी के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

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