NGV PRAKASH NEWS की विशेष रिपोर्ट..


नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025
धनतेरस के अवसर पर देशभर के बाजारों में आज खरीदारों की भारी भीड़ रही। Confederation of All India Traders (CAIT) के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस के दिन पूरे भारत में कुल व्यापार का मूल्य 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इस व्यापार का लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का हिस्सा केवल सोने‑चांदी के कारोबार का था। राजधानी दिल्ली में ही सोना‑चांदी का कारोबार 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंचा, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक है।
विशेष रूप से इस साल सोने की कीमतें पिछले वर्ष के लगभग 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,30,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमतें 98,000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 1,80,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं। इसके बावजूद भी उपभोक्ताओं ने पारंपरिक उत्साह और विश्वास के साथ खरीदारी जारी रखी।
धनतेरस पर पारंपरिक रूप से सोना‑चांदी के गहनों, सिक्कों, बर्तनों, पूजा‑सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वाहन आदि की खरीदारी की जाती है। इस बार उपभोक्ताओं की रुचि घरेलू और देशी उत्पादों की ओर बढ़ी। इसके पीछे मुख्य कारण जीएसटी दरों में कटौती और ‘स्वदेशी अपनाओ’ के आह्वान को माना जा रहा है। स्थानीय और छोटे व्यापारियों को इसका सीधा लाभ मिला, जिससे त्योहार की खरीदारी में उत्साह और बढ़ा।
खरीदारों ने सोना‑चांदी के गहनों में हल्के और छोटे डिज़ाइन को प्राथमिकता दी। सिक्कों और छोटे आभूषणों की मांग इस बार अधिक रही, जबकि बड़े गहनों की बिक्री अपेक्षाकृत कम रही। वहीं, चंडीगढ़, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी बाजारों में भारी भीड़ रही और ग्राहकों ने उच्च कीमतों के बावजूद खरीदारी जारी रखी।
सोने‑चांदी के अलावा, भारतीय गृहस्थों ने इस धनतेरस पर तांबे, चांदी या स्टील के नए बर्तन, रसोई उपकरण, झाड़ू और पूजा‑सामग्री भी बड़ी संख्या में खरीदे। मान्यता है कि झाड़ू खरीदने से घर में दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी का आगमन सुनिश्चित होता है। आधुनिक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद जैसे मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य उपकरण भी शुभ मानकर खरीद रहे हैं।
इस धनतेरस पर कुल व्यापार में बर्तन और रसोई के सामान का हिस्सा करीब 15 हजार करोड़ रुपये, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल सामान का 10 हजार करोड़ रुपये, सजावट और पूजा सामग्री का 3 हजार करोड़ रुपये तथा ड्राई फ्रूट, फल, मिठाई, वस्त्र और वाहन पर लगभग 12 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने‑चांदी की बढ़ती कीमतों के बावजूद उपभोक्ताओं का उत्साह यह दर्शाता है कि भारतीय बाजार और त्योहारों के दौरान उपभोक्ता विश्वास मजबूत बना हुआ है। यह न केवल परंपरा की जीवंतता को दर्शाता है, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी उत्साह और खरीदारी की गति को प्रोत्साहित करता है।
इस वर्ष की खरीदारी में यह भी देखा गया कि उपभोक्ताओं ने स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों को भी लाभ हुआ। व्यापारियों ने कहा कि इस बार खरीदारी में युवा वर्ग और महिलाओं की भागीदारी पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रही।
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