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हरिद्वार में शादीशुदा लोगों का तीसरे पार्टनर संग लिव-इन की ओर रुझान, यूसीसी लागू होने के बाद बढ़े आवेदन
हरिद्वार, 20 नवंबर 2025
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बाद पूरे प्रदेश में आवेदन प्रक्रिया चल रही है, लेकिन हरिद्वार जिले में इसका एक अलग ही स्वरूप सामने आया है। यहां न केवल अविवाहित प्रेमी जोड़े, बल्कि पहले से शादीशुदा लोग भी तीसरे पार्टनर के साथ लिव-इन में रहने की इच्छा जताते हुए आवेदन कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, हरिद्वार जिले में अब तक लिव-इन रजिस्ट्रेशन के लिए 40 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से हरिद्वार तहसील में मिले 13 आवेदनों में 5 आवेदन ऐसे लोगों के हैं, जो पहले से विवाहित हैं। एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि विवाहित व्यक्तियों के ये आवेदन नियमों के विरुद्ध होने के कारण रद्द कर दिए गए हैं, जबकि दो जोड़ों को लिव-इन में रहने की अनुमति दी गई है। जिले में कुल 18 जोड़े बिना शादी के साथ रह रहे हैं और उन्होंने औपचारिक आवेदन दिए हैं।
शादीशुदा लोग लिव-इन में क्यों आ रहे?
समाज में बढ़ते एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और वैवाहिक असंतुष्टि को इस प्रवृत्ति की प्रमुख वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कई विवाहित व्यक्तियों के जीवन में तीसरे पार्टनर की एंट्री के बाद रिश्ते जटिल होते जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वे कानूनी शादी बरकरार रहते हुए भी अलग तरह की जीवनशैली अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं।
साइलेंट डिवोर्स की बढ़ती अवधारणा
हरिद्वार के मैरिज काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट डॉ. मुकुल अग्रवाल के मुताबिक, उनके पास ऐसे कई मामले पहुंच रहे हैं जहां पति-पत्नी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से अलग होकर ‘साइलेंट डिवोर्स’ की स्थिति में जी रहे हैं। कानूनी रूप से विवाह कायम रहते हुए भी यह दंपती अलग मानसिक दुनिया में जीते हैं और अक्सर तीसरे पार्टनर के साथ रहने की ओर आकर्षित होने लगते हैं। ऐसे ही दंपतियों द्वारा लिव-इन रजिस्ट्रेशन के लिए किए गए आवेदन तेजी से बढ़ रहे हैं।
हरिद्वार में सामने आई यह प्रवृत्ति बदलते सामाजिक दृष्टिकोण, वैवाहिक रिश्तों में खटास और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती सोच की ओर इशारा करती है। प्रशासन का कहना है कि नियमों के अनुरूप ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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