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ब्रजघाट श्मशान में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया: अंतिम संस्कार के दौरान लाश की जगह मिली प्लास्टिक की डमी, 50 लाख के बीमा क्लेम की तैयारी कर रहा था दुकानदार | NGV PRAKASH NEWS
हापुड़, 27 नवंबर 2025
गंगा तट पर बसे तीर्थस्थल ब्रजघाट के मुख्य श्मशान घाट पर गुरुवार दोपहर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को हैरान कर दिया। अंतिम संस्कार के लिए लाए गए कथित शव का जब कपड़ा हटाया गया, तो सामने इंसान की लाश नहीं बल्कि प्लास्टिक और कपड़े से तैयार की गई डमी निकली। कुछ ही पलों में श्मशान घाट पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
स्थानीय पंडों और मौजूद लोगों ने संदिग्ध हालात देखते हुए शव लेकर पहुंचे कमल कुमार सोमानी और उसके साथी आशीष खुराना की कार की तलाशी ली। कार की डिग्गी में दो और मानव आकार की डमी मिलीं। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ में सामने आया कि दिल्ली के पालम की कैलाश कॉलोनी निवासी कमल कुमार सोमानी करोल बाग में कपड़ों की दुकान चलाता है। दुकान लगातार घाटे में चल रही थी और उस पर करीब 50–55 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। बढ़ते ब्याज और आर्थिक संकट से परेशान होकर वह अवसाद में था और कर्ज चुकाने के लिए बीमा धोखाधड़ी की योजना बना बैठा।
कमल की दुकान पर ओडिशा निवासी अंशुल कुमार कई सालों से सेल्समैन था। करीब एक साल पहले कमल ने किसी बहाने उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो और हस्ताक्षर ले लिए। इन्हीं दस्तावेजों से उसने टाटा AIA लाइफ इंश्योरेंस में अंशुल के नाम से 50 लाख रुपये की जीवन बीमा पॉलिसी ले ली। प्रीमियम भी वह खुद भरता रहा ताकि पॉलिसी सक्रिय रहे।
योजना के तहत 21 और 22 नवंबर को कमल ने अपने परिचितों को बताया कि अंशुल बीमार है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 26 नवंबर की रात उसने यह अफवाह फैला दी कि अंसारी अस्पताल ने अंशुल को मृत घोषित कर दिया है। कथित रूप से सीलबंद ताबूत अस्पताल से प्राप्त कर दोनों ब्रजघाट अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े। असल में उन्होंने मानव आकार की डमी खरीदी थी, जिसे कपड़े में लपेटकर शव जैसा रूप दे दिया गया था।
श्मशान घाट पर अंतिम स्नान और कपड़े बदलने की रस्म शुरू हुई तो डमी का राज खुल गया। प्लास्टिक की हड्डियां, कपड़ा और वजन के लिए भरी गई रेत देखकर पंडित और मौजूद लोग हैरान रह गए। कार से बरामद दो और डमी इस धोखाधड़ी को और बड़ा दिखाती हैं, जैसे कोई बड़ा फर्जीवाड़ा रचा जा रहा था।
पुलिस ने मौके पर कमल के फोन से अंशुल को वीडियो कॉल किया तो पूरा सच सामने आ गया। अंशुल बिल्कुल स्वस्थ मिला और उसने बताया कि वह 15 दिन पहले छुट्टी लेकर प्रयागराज अपने गांव चला गया था। उसे इस पूरे खेल की कोई जानकारी नहीं थी।
फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और बीमा धोखाधड़ी तथा अन्य गंभीर धाराओं में मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।
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