Gyan Prakash Dubey


जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार नगर पंचायत नगर बाजार का भतरिंहा जोत — दशकों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित
बस्ती, 29 नवम्बर 2025 | NGV PRAKASH NEWS
सेना के लिए भूतपूर्व और वर्तमान मिला कर 4 जवान देने वाला 12 घर का वह गांव जो अब 20 घर का हो चुका है | अपने लोगों के खुद के मेहनत के बल पर विकास के पद पर अग्रसर है परंतु जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा का शिकार है मूलभूत सुविधाओं जैसे शुद्ध पेयजल, निकासी की व्यवस्था से वंचित बस्ती जिले के बस्ती–कलवारी–टांडा मार्ग पर स्थित नगर बाजार कस्बा, जो बस्ती मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर है, तीन वर्ष पहले नगर पंचायत के रूप में घोषित किया गया था। नगर पंचायत बनने के पहले नगर ग्राम सभा में में नगर बाजार कस्बे के साथ फुलवरिया निषाद, राजघाट, बसनी डीह, गोसाईजोत, बालगोड़ा घाव समेत लगभग 20 घरों वाला छोटा गांव भतरिंहा जोत भी शामिल है। पूरी तरह ब्राह्मण आबादी वाला यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
राजनीतिक उपेक्षा और मतदान की गलत धारणाएं
भतरिंहा जोत में करीब सौ मतदाता हैं। नगर पंचायत बनने से पहले ग्राम पंचायत के रूप में यहां सभी राजनीतिक दल प्रचार करने आते थे। लेकिन धीरे-धीरे यह धारणा बन गई कि यह गांव पूरी तरह भाजपा समर्थक है। इस वजह से भाजपा इस गांव को अपना समझकर सक्रिय नहीं रही और विपक्षी दलों ने इसे “भाजपाई गांव” मानकर दूरी बना ली। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह धारणा पूरी तरह गलत थी, लेकिन इसी गलतफहमी ने विकास की रफ्तार रोक दी।
दशकों तक उपेक्षित रहा गांव, सड़कें सिर्फ कागज पर बनीं
गांव में जल निकासी, शुद्ध पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी जरूरतें लंबे समय तक पूरी नहीं हो पाईं। बारिश होने पर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को नगर बाजार पहुंचने के लिए तीन से चार किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाना पड़ता था। दो दशक के प्रधानी काल में एक प्रधान तथा उनके प्रतिनिधि ने कई बार कागजों में सड़क बनवाई, लेकिन जमीनी हकीकत में सिर्फ मेड़ ही डाली गई। सड़क की वास्तविक स्थिति बेहद खराब रही, जिससे ग्रामीण लगातार परेशान होते रहे।
कुछ जागरूक ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में अनियमितताओं का वीडियो बनाकर शासन तक शिकायत पहुंचाई, जिसके बाद दबाव में आकर अधूरा काम कराया गया। बाद में उस समय की सपा सरकार में दिवंगत मंत्री रामकरण आर्य ने सड़क को पक्का करवाया।
बिजली व्यवस्था बदहाल, ट्रांसफार्मर बार-बार जलता है
कभी तीन घरों में बिजली कनेक्शन वाले इस गांव में अब 30 से अधिक घरों में कनेक्शन हैं, लेकिन ट्रांसफार्मर अब भी 25 kVA का ही है। पहले यहां 65 kVA का ट्रांसफार्मर लगा था, जिसे घटा दिया गया। परिणामस्वरूप लोड बढ़ने पर ट्रांसफार्मर अक्सर जल जाता है और महीने के भीतर दो-दो बार बदलना पड़ता है। इसके बावजूद न कृषि विभाग, न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर ध्यान दे रहे हैं।
नगर पंचायत बनने के बाद उम्मीदें जागीं, लेकिन कई जरूरतें बाकी
नगर पंचायत बनने के बाद जब नीलम सिंह राणा ने प्रथम अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला, तो गांव को विकास की उम्मीद जगी। उनके कार्यकाल में टूटी सड़क को इंटरलॉकिंग के रूप में पुनर्निर्मित कराया गया और सफाई कर्मी नियुक्त किए गए। इससे गांव में कुछ सुधार दिखा, लेकिन अभी भी शुद्ध पानी की व्यवस्था और गंदे पानी की निकासी के लिए नाली जैसी अत्यंत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
नगर पंचायत द्वारा हर शनिवार को अलग-अलग वार्डों में सफाई अभियान चलाया जाता है और मंगलवार को योग दिवस व वरिष्ठ नागरिक सम्मान दिवस के कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन वार्ड संख्या 6, भवानी प्रसाद नगर से जुड़े भतरिंहा जोत में ऐसा लगता है कि अधिकारियों की नजर अब भी नहीं पहुंच पाई है।
गांव के लोगों का कहना है कि कई वर्षों से उपेक्षा झेल रहा यह इलाका आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि अब इस ओर ध्यान देकर गांव को मूलभूत सुविधाओं से लैस करेंगे।
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