एक करोड़ कर्ज में डूबे व्यापारी नें गंगा में कूद कर दे दी जान : सुसाइड नोट में लिखा यह कारण

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वाराणसी में कर्ज से परेशान इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी ने गंगा में कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में एक व्यापारी पर लगाया रुपये हड़पने का आरोप

वाराणसी, 4 दिसंबर 2025।
दशाश्वमेध घाट पर मंगलवार दोपहर इलेक्ट्रॉनिक सामानों के 67 वर्षीय कारोबारी सुरेंद्र केसरी उर्फ मुन्ना ने गंगा में कूदकर आत्महत्या कर ली। देर रात एनडीआरएफ टीम ने मणिकर्णिका घाट के पास से उनका शव बरामद किया। बुधवार सुबह परिजन शव लेकर थाने पहुंचे और बताया कि उनके कमरे की दराज से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें एक अन्य व्यापारी पर निवेश के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये हड़पने का आरोप लगाया गया है।

नाश्ता लेने भेजा कर्मचारी, खुद गंगा में कूद गए
बड़ादेव (दशाश्वमेध) निवासी सुरेंद्र केसरी की मोहल्ले में इलेक्ट्रॉनिक सामानों की दुकान थी। तीन बेटियों और एक बेटे के पिता सुरेंद्र मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे दुकान के कर्मचारी के साथ घर से निकले थे। दशाश्वमेध घाट पहुंचकर उन्होंने कर्मचारी को नाश्ता लाने भेज दिया। कर्मचारी लौटकर आया तो सुरेंद्र कहीं दिखाई नहीं दिए। लोगों ने बताया कि उन्होंने गंगा में छलांग लगा दी है। सूचना मिलते ही परिवार और पुलिस तलाश में जुट गए।

देर रात मिला शव, पुलिस के पास पहुंचे परिजन
देर रात गोताखोरों ने शव निकालकर परिजनों के सुपुर्द किया। बुधवार सुबह करीब नौ बजे परिजन शव लेकर दशाश्वमेध थाने पहुंचे और सुसाइड नोट की जानकारी पुलिस को दी। नोट में लिखा था कि उन्होंने लोन और कर्ज लेकर एक व्यापारी के कहने पर निवेश किया था, लेकिन पैसा डूब गया। कर्जदार लगातार दबाव बना रहे थे, जिससे तनाव में आकर उन्होंने यह कदम उठाया।

कोविड के पहले से चला आ रहा था निवेश, नहीं मिली वापसी
एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी के मुताबिक, सुसाइड नोट में जिसके खिलाफ आरोप लगाया गया, वह भी पूछताछ में शामिल हुआ। उसने बताया कि कोरोना से पहले सुरेंद्र ने उसके कारोबार में निवेश शुरू किया था और प्रारंभिक समय में मुनाफा हुआ भी। लेकिन कोविड के दौरान कारोबार ठप हो गया और पूंजी डूबने लगी।

कोरोना के बाद बाजार सुधरा तो सुरेंद्र ने नुकसान की भरपाई और मुनाफे की उम्मीद में और पैसा लगाया। इसके लिए उन्होंने लोन लिया और अन्य कारोबारियों से कर्ज भी जुटाया। इसके बावजूद लाभ नहीं हुआ और कुल मिलाकर करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

एसीपी के अनुसार, ज्यादातर लेन-देन बिना लिखित समझौते के थे, इसलिए स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं। मामले की जांच की जा रही है।

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