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सीतामढ़ी में HIV का गंभीर संकट: 7,400 से अधिक मरीज, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
11 दिसंबर 2025 | सीतामढ़ी
बिहार के सीतामढ़ी जिले में HIV संक्रमण के मामलों ने अचानक विस्फोटक रूप ले लिया है। ताज़ा मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जिले में HIV पॉजिटिव मरीजों की संख्या 7,400 के पार पहुँच चुकी है, जबकि हर महीने 40 से 60 नए मरीज सामने आ रहे हैं। आंकड़े सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
हालांकि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह संख्या 6707 बताई जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर से 5,000 मरीज नियमित रूप से दवाई ले रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग जिले से बाहर इलाज करा रहे हैं।
डॉक्टर हसीन अख्तर ने चेतावनी दी — “पॉजिटिव मरीज निगेटिव से शादी न करें”
सदर अस्पताल के मेडिकल अफसर डॉ. हसीन अख्तर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोगों को HIV जागरूकता को गंभीरता से लेना होगा।
उन्होंने कहा—
“जितने भी हमारे पॉजिटिव मरीज हैं, वे निगेटिव लोगों से शादी न करें। इससे संक्रमण तेजी से फैलता है।”
संक्रमण फैलने की सबसे बड़ी वजह — माइग्रेशन
सीतामढ़ी से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में मजदूरी के लिए जाते हैं। डॉक्टर अख्तर के अनुसार—
“बाहर काम करने जाने वाले लोगों में संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है, और लौटने पर परिवार भी प्रभावित होते हैं।”
400 से अधिक नाबालिग बच्चे भी HIV संक्रमित
आंकड़ों के अनुसार, 428 बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों में यह संक्रमण अधिकतर मामलों में माता-पिता के जरिए प्रसव के समय पहुंचा है।
जागरूकता अभियान तेज, गांव-गांव में टेस्टिंग शुरू
जिला प्रशासन ने एआरटी सेंटर और स्वास्थ्य टीमों को निर्देश दिया है कि—
- गांवों में शिविर लगाकर HIV टेस्टिंग बढ़ाई जाए
- युवाओं, मजदूरों और महिलाओं के बीच एड्स जागरूकता अभियान तेज किया जाए
- संक्रमण छिपाने वालों पर विशेष निगरानी रखी जाए
मरीजों की संख्या पर संशय — असली आंकड़ा क्या है?
सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि HIV मरीजों की संख्या 7400 नहीं बल्कि 6707 है, और यह कुल आंकड़ा 1 दिसंबर 2012 से 1 दिसंबर 2025 तक का है।
यानी कि यह 13 वर्षों का डेटा है, न कि केवल किसी एक वर्ष का।
इसके बावजूद संक्रमण की लगातार बढ़ती रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग ने चेताया है कि यदि जागरूकता और टेस्टिंग में तेजी नहीं लाई गई, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
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