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200 करोड़ के ठेके का झांसा, लग्जरी जिंदगी की चमक और फरेब का अड्डा—फर्जी IAS ललित किशोर की ठगी साम्राज्य का बड़ा पर्दाफाश
गोरखपुर,
11 दिसंबर 2025
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार के नेटवर्क और हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। खुद को 2022 बैच का आईएएस बताने वाला यह जालसाज महंगी गाड़ियों, किराए के गनरों, निजी मैनेजर और सरकारी अधिकारी जैसे रुतबे का दिखावा करके लोगों को विश्वास में लेता था। जांच में सामने आया है कि उसका मासिक खर्च 5 लाख रुपये से भी अधिक था और वह इसी ठाठ-बाट के सहारे शिकार तलाशता था।
बिहार के सीतामढ़ी के मेहसौल का रहने वाला ललित किशोर कभी सुपर 100 कोचिंग सेंटर में गणित शिक्षक हुआ करता था। वर्ष 2023 में वह एडमिशन के नाम पर दो लाख रुपये वसूलने के आरोप में कोचिंग से निकाल दिया गया। एमएससी के बाद वह मैथ से पीएचडी कर रहा था, लेकिन इसी दौरान उसने फर्जी पहचान और दिखावे के जरिए करोड़ों की ठगी का रास्ता अपना लिया।
ललित की आपराधिक पृष्ठभूमि भी लंबी है। उसके खिलाफ वर्ष 2016 में रीगा थाना सीतामढ़ी में एक युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने का केस दर्ज हुआ था, जो अब उसकी पत्नी है। दो बच्चों के पिता ललित पिछले पांच महीनों से अपनी पत्नी, बच्चों और साले के साथ गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था, जहां से पूरा फरेबी नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
गनर, मैनेजर, लग्जरी गाड़ियां—सब किराए पर
एसपी सिटी के अनुसार ललित हमेशा 10–12 गनरों की सुरक्षा घेरे में चलता था और हर गनर को 30 हजार रुपये मासिक देता था। एक निजी मैनेजर भी रखा था, जिसकी तनख्वाह 60 हजार रुपये थी। स्कॉर्पियो और अर्टिगा जैसी दो महंगी गाड़ियों पर वह हर महीने 30–30 हजार रुपये ईएमआई भर रहा था।
गोरखपुर के नामचीन होटलों में 30 हजार रुपये से ऊपर मासिक किराया देकर रहता था और अपनी गाड़ियों पर सरकारी कार्य लिखवा कर असली आईएएस अफसर जैसा माहौल तैयार कर लेता था। भारी-भरकम काफिले और दिखावे से लोग आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे।
एक पत्नी, चार प्रेमिकाएं—तीन गर्भवती
जांच ने उसके निजी जीवन का और भी चौंकाने वाला पहलू उजागर किया है। उसकी एक पत्नी के अलावा चार प्रेमिकाएं हैं, जिनमें तीन गोरखपुर और एक सीतामढ़ी की रहने वाली हैं। इनमें से तीन गर्भवती मिली हैं। आरोपी उन पर लाखों रुपये, महंगे मोबाइल, ज्वैलरी और ब्रांडेड सामान पर खर्च कर रहा था। अपनी हाई-प्रोफाइल छवि बनाए रखने में वह किसी तरह की कमी नहीं छोड़ता था।
स्कूलों में फर्जी निरीक्षण, बोर्ड परीक्षाओं के दौरान काफिले के साथ पहुंचता था
ललित पिछले पांच महीनों में भटहट, पीपीगंज, कैम्पियरगंज सहित कई इलाकों के स्कूलों में फर्जी आईएएस बनकर निरीक्षण करने गया। बोर्ड परीक्षा के दौरान वह दो लग्जरी गाड़ियों और गनरों के काफिले के साथ स्कूल पहुंचता था। हालांकि धन उगाही की शिकायतें अभी सामने नहीं आई हैं, लेकिन पुलिस जांच तेज कर चुकी है।
AI टेक्नोलॉजी से बनाता था फर्जी सरकारी दस्तावेज
ललित की सबसे खतरनाक चाल इसकी तकनीकी जालसाजी है। वह एआई की मदद से मीटिंग लेटर, मंत्रालयों के नोट, नियुक्ति आदेश, अनुमोदन पत्र और अधिकारियों की मीटिंग के फर्जी फोटो तैयार करता था। किसी असली अधिकारी की तस्वीर हटाकर उसकी जगह अपना फोटो लगा देता था, जिससे पीड़ितों को झांसा देना आसान हो जाता था। पुलिस ने उसके कब्जे से देवरिया जिलाधिकारी की मीटिंग का एक मॉर्फ्ड फोटो भी बरामद किया है।
पूरा नेटवर्क जांच के दायरे में
एसएसपी के निर्देश पर पुलिस आरोपी से जुड़े पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि दस्तावेज तैयार करने में कौन-कौन शामिल था और अब तक कितने लोगों को उसने अपना शिकार बनाया है।
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