बर्खास्त सिपाही का पॉश एरिया में 5 सितारा होटल को देता मात देता बंगला.. कहां से आया इतना धन?

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‘यह कांस्टेबल का घर है?’— लखनऊ के पॉश इलाके में बर्खास्त सिपाही का आलीशान बंगला देख सोशल मीडिया में मचा शोर

लखनऊ 15 दिसम्बर 25।

उत्तर प्रदेश पुलिस से बर्खास्त किए गए सिपाही आलोक प्रताप सिंह का लखनऊ के पॉश इलाके में बना आलीशान बंगला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के दौरान सामने आए इस बंगले का वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, लोगों के सवाल भी उसी रफ्तार से उठने लगे। सबसे ज्यादा दोहराया जाने वाला सवाल यही है कि क्या महज 40 हजार रुपये महीने की तनख्वाह पाने वाला कोई कांस्टेबल इतनी भव्य संपत्ति खड़ी कर सकता है?

वायरल वीडियो में एक बहुमंजिला, आधुनिक डिजाइन वाला विशाल बंगला दिखाई देता है, जिसका बाहरी और अंदरूनी वैभव आम पुलिसकर्मी की आय से कहीं अधिक प्रतीत होता है। सोशल मीडिया पर लोग इसे देखकर हैरानी जता रहे हैं और कानून व्यवस्था से जुड़े तंत्र पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि यह बंगला किसी बड़े कारोबारी या रियल एस्टेट डेवलपर का लग रहा है, न कि एक कांस्टेबल का।

गौरतलब है कि आलोक प्रताप सिंह को 2 दिसंबर को राज्य टास्क फोर्स ने गिरफ्तार किया था। उस पर फेनसिडिल समेत कोडीन-आधारित कफ सिरप की अवैध तस्करी, भंडारण और हेराफेरी से जुड़े एक अंतरराज्यीय नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे उत्तर प्रदेश पुलिस से बर्खास्त कर दिया गया।

जांच में सामने आया है कि आलोक सिंह की इस नेटवर्क में एंट्री आज़मगढ़ के विकास सिंह के जरिए हुई थी, जिसने उसकी मुलाकात सरगना शुभम जायसवाल से कराई। बताया जाता है कि शुभम जायसवाल रांची से ‘शैली ट्रेडर्स’ नाम की एक फर्जी कंपनी के जरिए सिरप तस्करी का बड़ा रैकेट चला रहा था। इस नेटवर्क के तहत प्रतिबंधित सिरप पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक भेजा जाता था।

एसटीएफ और ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आलोक सिंह ने अपने सहयोगी अमित कुमार सिंह के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार में निवेश किया। दोनों ने कथित तौर पर पांच-पांच लाख रुपये लगाए और अपनी आधिकारिक आय से कई गुना अधिक, करीब 20 से 22 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। अधिकारियों के अनुसार, सिंह की पहचान और जाली लाइसेंसों का इस्तेमाल कर धनबाद में ‘श्रेयासी मेडिकल एजेंसी’ और वाराणसी में ‘मां शारदा मेडिकल’ के नाम से फर्जी मेडिकल कंपनियां बनाई गईं। इन कंपनियों के जरिए फर्जी चालान और ई-वे बिल तैयार कर प्रतिबंधित पदार्थों की अवैध बिक्री को अंजाम दिया गया।

ईडी ने अब इस मामले में अपनी वित्तीय जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। बर्खास्त सिपाही के आलीशान बंगले की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद कानून प्रवर्तन तंत्र में भ्रष्टाचार, अवैध कमाई और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियां कैसे और कब तक बिना किसी की नजर में आए चलती रहीं।

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