जान बचाने वाली वैक्सीन ही अगर जानलेवा बन जाए तो हड़कंप तो मचेगा ही |
👉परंतु इस पर जो विशेषज्ञों का कहना है कि कोविशील्ड वैक्सीन का साइड इफेक्ट 10 लाख लोगों में से एक लोग को हो सकता है साथ ही उनका यह भी कहना है कि इसके जो साइड इफेक्ट है वह 6 महीने के अंदर ही अपना असर दिखाते हैं | वहीं डॉक्टर का ये भी कहना है की इससे घबड़ाने जैसी कोई बात नहीं है |
👉 अगर साइड इफेक्ट की बात करें तो लगभग सभी दवाओं का साइड इफेक्ट होता है लेकिन वह रेयर मामलो में ही होता है +
कोरोना का दौर कोई भी भूल नहीं पाएगा | वायरस से बचने के लिए वैक्सीन लगाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा था,लोगों को वैक्सीन की डोज दी जा रही थी, लेकिन अब उस वैक्सीन डोज को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है |
कोविड वैक्सीन बनाने वाली ब्रिटेन की फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट के सामने स्वीकारा है कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन से गंभीर साइड इफेक्ट हो रहे हैं,जिस वैक्सीन को लोगों ने जान बचाने वाली वैक्सीन समझा था, उसके जानलेवा साइड इफेक्ट की बात कंपनी ने खुद स्वीकार की है.
कोविड वैक्सीन कोविशील्ड बनाने वाली दुनिया की दिग्गज फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) के खुलासा किया कि कोरोना वैक्सीन से टीटीएस जैसे दुर्लभ साइड इफेक्ट हो सकते हैं | थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम से शरीर में खून का थक्का बनने लगता है और व्यक्ति को स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है |कंपनी के इस खुलासे ने हड़कंप मचा दिया है |
हम आपको उस कंपनी के
बारे में बता रहे हैं, जो कोविशील्ड वैक्सीन बनाती है.
ब्रिटेन की दिग्गज दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) कोविशील्ड वैक्सीन तैयार करती है. कंपनी का इतिहास 100 साल से भी पुराना है. इसकी गिनती दुनिया की दिग्गज फार्मा कंपनियों में होती है. भारत में इसी फॉर्मूले से बनी कोवीशील्ड के 175 करोड़ डोज लोगों को दिए गए |
भारत में अडार पूनावाला के सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड तैयार की थी |
एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर इस वैक्सीन को तैयार किया है. भारत के लिए कोविशील्ड वैक्सीन बनाने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ने जनवरी 2021 में एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड के साथ डील की थी.

