नमो भारत ट्रेन में संबंध बनाने वाले कपल के ऊपर हुआ FIR…

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नमो भारत ट्रेन में अश्लील कृत्य का मामला, छात्र-छात्रा और वीडियो वायरल करने वाले कर्मचारी पर एफआईआर

दिल्ली–मेरठ के बीच संचालित नमो भारत ट्रेन में कथित रूप से शारीरिक संबंध बनाते दिखे छात्र-छात्रा और उस घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले कर्मचारी के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। यह एफआईआर एनसीआरटीसी की शिकायत पर गाजियाबाद जिले के मुरादनगर थाने में दर्ज की गई है। वीडियो वायरल होने के बाद से ही यह मामला सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ था।

करीब एक सप्ताह पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप वायरल हुई थी, जिसमें चलती ट्रेन की सीट पर बैठे एक युवक और युवती आपत्तिजनक अवस्था में दिखाई दे रहे थे। बाद में इससे जुड़े कुछ और क्लिप भी सामने आए। कपड़ों और बैग से अनुमान लगाया जा रहा था कि दोनों किसी कॉलेज के छात्र हैं, हालांकि पुलिस द्वारा अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

जांच में सामने आया कि यह वीडियो ट्रेन के सीसीटीवी सिस्टम से रिकॉर्ड किया गया था और इसे एक ऑपरेटर ने बाहर निकालकर वायरल किया। आरोपी कर्मचारी की पहचान ऋषभ कुमार के रूप में हुई है, जिसे एनसीआरटीसी ने प्रारंभिक जांच के बाद पहले ही सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके बाद मेंटेनेंस एजेंसी डीआरआरसीटी के अधिकारी दुष्यंत कुमार ने मुरादनगर थाने में लिखित शिकायत दी, जिसके आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

एसीपी मसूरी सर्किल लिपि नगायच के अनुसार छात्र-छात्रा और आरोपी ऑपरेटर ऋषभ कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य, धारा 77 के तहत दृश्यरति यानी वॉयेरिज़्म और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण का मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस का कहना है कि वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और ट्रेन के रूट डेटा को खंगाला जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दोष सिद्ध होने की स्थिति में धारा 296 के तहत अधिकतम तीन महीने की कैद, एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं, जबकि धारा 77 के तहत न्यूनतम एक वर्ष से लेकर अधिकतम तीन वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। आईटी एक्ट के तहत भी अलग से दंड का प्रावधान है।

फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों की जांच कर रही है और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। मामले को संवेदनशील मानते हुए पुलिस और एनसीआरटीसी दोनों ने यह स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक परिवहन की गरिमा और यात्रियों की निजता से जुड़े ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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