
NGV PRAKASH NEWS
05 जनवरी 2026
अकेलापन दूर करने के लिए ‘किराए’ पर मिल रहे संगी-साथी, बड़े शहरों में बढ़ता चलन
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग भीड़ में रहते हुए भी खुद को अकेला महसूस करने लगे हैं। मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन चैट के बावजूद बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें किसी से आमने-सामने बात करने का मौका ही नहीं मिल पाता। इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए अब दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, गुरुग्राम और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में एक नया चलन शुरू हो गया है — जहां लोग पैसे देकर बातचीत के लिए साथी ढूंढ रहे हैं।
कई स्टार्टअप और कंपनियां अब ऐसे प्लेटफॉर्म चला रही हैं, जहां लोग सुरक्षित माहौल में किसी से मिलकर बैठ सकते हैं, बात कर सकते हैं, अपने मन की बातें साझा कर सकते हैं और किसी की बात सुन सकते हैं। यहां मकसद डेटिंग नहीं, बल्कि इंसानी जुड़ाव और भावनात्मक सहारा होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया ने लोगों को जुड़े होने का एहसास तो दिया है, लेकिन असली बातचीत की कमी ने भावनात्मक दूरी बढ़ा दी है। नौकरी या पढ़ाई के लिए गांव-कस्बों से शहर आए लोग, परिवार से दूर रहने वाले युवा और अकेले रहने वाले लोग इस समस्या से ज्यादा जूझ रहे हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार लंबे समय तक अकेले रहने से डिप्रेशन, तनाव और चिंता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए अब लोग ऑनलाइन चैट की बजाय ऐसे ऑफलाइन कार्यक्रमों की तलाश कर रहे हैं, जहां वे बिना झिझक अपनी बात कह सकें और किसी की बात ध्यान से सुनी जा सके।
इन कार्यक्रमों में आमतौर पर सीमित लोग ही बुलाए जाते हैं ताकि माहौल सहज और सुरक्षित रहे। प्रवेश के लिए टिकट होता है, पहचान की जांच होती है और कई जगह डेटिंग की इजाजत नहीं होती। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सिर्फ गंभीर और सही उद्देश्य से आने वाले लोग ही शामिल हों।
कुल मिलाकर यह नया चलन इस बात का संकेत है कि लोग अब सिर्फ मोबाइल स्क्रीन तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे फिर से इंसानों से जुड़ना चाहते हैं, बात करना चाहते हैं, सुनना चाहते हैं और महसूस करना चाहते हैं कि वे अकेले नहीं हैं।
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