पुलिस के हस्तक्षेप से…


संविधान ने दिया बराबरी का हक, लेकिन समाज में जातिवाद का जहर अब भी जिंदा
हमीरपुर। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और गरिमा के साथ जीने की गारंटी देता है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस समाज की कल्पना की थी, उसमें जातिवाद के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए थी। संविधान के अनुच्छेद 15 और 17 स्पष्ट रूप से भेदभाव और अस्पृश्यता को समाप्त करने की बात करते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत आज भी यह बताती है कि जातिवाद की जड़ें समाज में गहराई तक फैली हुई हैं।
इसकी ताजा बानगी हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में देखने को मिली। यहां एक मृत व्यक्ति को भी जातिवाद का शिकार होना पड़ा। अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले व्यक्ति के शव को ऊंची जाति के लिए बने श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी गई। मामला इतना बढ़ गया कि दो घंटे तक विवाद चला और अंत में प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ही अंतिम संस्कार हो पाया।
श्मशान घाट में भी भेदभाव
घटना बड़सर क्षेत्र की कड़साई पंचायत के भेवड़ सहेली श्मशान घाट की है। ननावां गांव के अनुसूचित जाति समुदाय के लिए निर्धारित श्मशान घाट का रास्ता बारिश के कारण खराब हो गया था और तेज पानी के बहाव के कारण वहां अंतिम संस्कार करना संभव नहीं था। ऐसे में मृतक के परिजन शव को नजदीकी भेवड़ सहेली श्मशान घाट ले आए, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध कर दिया।
विवाद बढ़ने पर पुलिस और प्रशासन को मौके पर आना पड़ा। लगभग डेढ़ घंटे की समझाइश और बातचीत के बाद प्रशासन के हस्तक्षेप से शव का अंतिम संस्कार हो पाया। यह घटना बताती है कि सामाजिक सोच में बदलाव के बिना केवल कानूनी प्रावधान जातिवाद को खत्म नहीं कर सकते।
स्थायी समाधान की जरूरत
कड़साई पंचायत ने बरसात के कारण रास्ता खराब होने की वजह से पहले ही पंचायत में प्रस्ताव रखा था कि शव का अंतिम संस्कार नजदीकी श्मशान घाट में किया जाए, लेकिन स्थानीय असहमति के कारण इसे मंजूरी नहीं मिली। बाद में एसडीएम बड़सर राजेंद्र गौतम ने हस्तक्षेप कर शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम संस्कार करवाया और आश्वासन दिया कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
समाज के लिए सीख
यह घटना हमें आईना दिखाती है कि जातिवाद सिर्फ जीवित इंसानों को नहीं, बल्कि मृतकों को भी नहीं छोड़ता। जब तक समाज अपनी मानसिकता में बदलाव नहीं लाएगा, संविधान द्वारा दी गई समानता और सम्मान की गारंटी अधूरी ही रहेगी।
NGV PRAKASH NEWS
