मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण पर सियासी बवाल के बीच,योगी ने कहा-काशी को बदनाम करने की हो रही साजिश…….

👉 कोई मूर्ति नहीं तोड़ी गई-योगी

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मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प पर सियासी संग्राम, योगी बोले– काशी को बदनाम करने की साजिश

वाराणसी, 17 जनवरी 2026 — काशी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प को लेकर इन दिनों जबरदस्त राजनीतिक घमासान छिड़ा हुआ है। एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार इसे विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ छेड़छाड़ करार दे रहा है। निर्माण कार्य के दौरान हो रही तोड़फोड़ को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन और बयानबाजी का दौर जारी है।

शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी दौरे पर पहुंचे और सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने इस विवाद पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत कर भ्रम फैलाया जा रहा है।

इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने मणिकर्णिका घाट के प्रस्तावित नए स्वरूप की तस्वीरें भी जारी की हैं। इन तस्वीरों में घाट का आधुनिक और व्यवस्थित रूप नजर आ रहा है। सरकार का दावा है कि नए निर्माण के बाद मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्लेटफार्म को बड़ा और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा, जिससे एक साथ कई अंतिम संस्कार आसानी से संपन्न हो सकें।

वर्तमान में मणिकर्णिका घाट तक पहुंचने के लिए संकरी गलियों से होकर गुजरना पड़ता है और वहां मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी काफी खराब मानी जाती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना के तहत मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प को भी अपने विजन काशी में शामिल किया था। पहले चरण के लिए 35 करोड़ रुपये की धनराशि पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है और जल्द ही घाट का नया स्वरूप सामने आने की बात कही जा रही है।

मणिकर्णिका घाट को महाश्मशान के रूप में जाना जाता है, जहां वर्ष के 365 दिन और 24 घंटे चिताओं की आग कभी नहीं बुझती। यह घाट धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बिल्कुल पास होने के कारण इसके पुनर्विकास की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान एक चबूतरे को हटाए जाने और कुछ मूर्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम परियोजना की शुरुआत के समय भी इसी तरह की साजिशें रची गई थीं। आज वही लोग टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर झूठा भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि काशी को नई वैश्विक पहचान मिली है और विकास कार्य प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखते हुए ही किए जा रहे हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए तीखा हमला बोला है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि सरकार ने कॉरिडोर के नाम पर काशी की ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर मंदिरों और प्राचीन संरचनाओं को तोड़ा जा रहा है, जो काशी की पहचान पर सीधा प्रहार है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह स्थान केवल धार्मिक ही नहीं, ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। विकास के नाम पर धरोहरों को मिटाना घोर पाप है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

फिलहाल मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प को लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार इसे काशी के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विरोधी दल इसे सांस्कृतिक विरासत पर चोट के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना जताई जा रही है।

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👉फोटो….. 3D आधारित

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