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गाजीपुर में रहस्यमयी बीमारी की चपेट में दर्जनों बच्चे, गांवों में फैला दहशत का माहौल
गाजीपुर, 18 जनवरी 2026 — उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक बेहद चिंताजनक और हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां लगभग एक दर्जन गांवों में मासूम बच्चे एक अज्ञात और रहस्यमयी बीमारी की चपेट में आकर मानसिक व शारीरिक रूप से दिव्यांग हो रहे हैं। यह बीमारी अब पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के फतेहुल्लापुर, बहादीपुर, हरिहरपुर, हाला, छोटी जंगीपुर सहित करीब 12 गांवों में इस बीमारी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, लेकिन 4 से 6 महीने बाद अचानक तेज बुखार की चपेट में आ जाते हैं। इसके बाद उनका शारीरिक और मानसिक विकास पूरी तरह रुक जाता है और वे ताउम्र के लिए दिव्यांगता का शिकार हो जाते हैं।
हरिहरपुर गांव का एक परिवार इस त्रासदी का जीता-जागता उदाहरण है। यहां की दो बेटियां जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ थीं, लेकिन कुछ महीनों के अंतराल पर दोनों को तेज बुखार आया और आज वे मानसिक रूप से अक्षम हो चुकी हैं। उनके पिता गुजरात में मजदूरी करते हैं और इलाज के लिए पैसे बचाने की मजबूरी में घर भी नहीं लौट पाते। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद डॉक्टर अब तक यह पता नहीं लगा सके हैं कि यह किस तरह की बीमारी या वायरस है।
लोगों के अनुसार स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई परिवार अपने बच्चों को रस्सियों या लोहे की जंजीरों से बांधकर रखने को मजबूर हैं। मानसिक संतुलन बिगड़ जाने के कारण बच्चे कभी घर से भाग जाते हैं तो कभी खुद को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। शिकारपुर, धरी कला, अगस्ता, भोरहा, भिक्केपुर और रठूली जैसे गांवों में लगभग हर दूसरे-तीसरे घर में 8 से 10 बच्चे इस रहस्यमयी बीमारी से ग्रसित बताए जा रहे हैं।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए ‘राष्ट्रीय युवा सम्मान’ से सम्मानित सिद्धार्थ राय ने पहल करते हुए मामले को शासन तक पहुंचाया। पहले उन्होंने इसे सामान्य बीमारी समझकर जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा था, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने औपचारिकता के तौर पर कैंप लगाया। लेकिन जब समस्या की गंभीरता स्पष्ट हुई तो सिद्धार्थ राय ने सीधे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया।
राज्यपाल के संज्ञान लेने के बाद उनके विशेष कार्य अधिकारी डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने गाजीपुर जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस बीमारी की जांच और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पत्र में बीमारी के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
हाल ही में जिलाधिकारी ने सिद्धार्थ राय को बुलाकर विस्तृत जानकारी ली है और भरोसा दिलाया है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित कर प्रभावित गांवों में गहन जांच और इलाज की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही मेडिकल विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बीमारी को जैपनीज इंसेफेलाइटिस या किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। जब तक उच्च स्तरीय मेडिकल जांच पूरी नहीं होती, तब तक इन मासूम बच्चों और उनके परिवारों का भविष्य अनिश्चितता के अंधेरे में ही रहेगा।
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