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रामपुर में पंचायत का अनोखा फैसला: दो पत्नियों के बीच पति का साप्ताहिक बंटवारा, रविवार को मिली ‘छुट्टी’
रामपुर, 22 जनवरी 2026
रामपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीण समाज में रिश्तों और सामाजिक फैसलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यहां ‘एक म्यान में दो तलवारें’ वाली कहावत को सुलझाने के लिए पंचायत ने ऐसा समाधान निकाला है, जिसकी चर्चा अब गांव से निकलकर पूरे इलाके में हो रही है। मामला दो पत्नियों के बीच पति के बंटवारे का है, जिसके लिए सप्ताह के सातों दिनों का बाकायदा लिखित शेड्यूल तैयार किया गया है।
यह पूरा मामला अजीमनगर थाना क्षेत्र के नगलिया आकिल गांव का है। गांव के एक युवक ने मुस्लिम रीति-रिवाज के तहत दो शादियां की थीं। पहली पत्नी अरेंज मैरिज के जरिए घर आई थी, जबकि दूसरी पत्नी से युवक ने प्रेम विवाह किया था। शुरुआती दिनों में परिवार में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन समय के साथ दोनों पत्नियों के बीच पति को अपने-अपने पास रखने को लेकर तनातनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि घर का माहौल खराब हो गया और अंततः मामला पुलिस तक पहुंच गया।
थाने में शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन समाधान न निकलता देख गांव के बुजुर्गों और पंचों की मौजूदगी में पंचायत बुलाई गई। पंचायत में पति और दोनों पत्नियों की बात विस्तार से सुनी गई। लंबी चर्चा के बाद पंचों ने विवाद खत्म करने के लिए एक अनोखा रास्ता निकाला—पति के समय का साप्ताहिक बंटवारा।
पंचायत के फैसले के मुताबिक सोमवार, मंगलवार और बुधवार को पति पहली पत्नी के साथ रहेगा। गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार दूसरी पत्नी के लिए तय किए गए हैं। फैसले का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि रविवार को पति को ‘संडे हॉलिडे’ दिया गया है। इस दिन वह किसी भी पत्नी के साथ रहने के लिए बाध्य नहीं होगा और अपनी मर्जी से अकेले समय बिता सकेगा।
पंचायत ने यह भी तय किया कि विशेष परिस्थितियों में दिन आगे-पीछे किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में फिर से विवाद न हो। इस पूरे समझौते को लिखित रूप में दर्ज किया गया और पति व दोनों पत्नियों से हस्ताक्षर कराए गए, ताकि बाद में कोई पक्ष मुकर न सके।
यहां बताते चलें कि कि पति के इस तरह के बंटवारे का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बिहार के पूर्णिया जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां पहली पत्नी को बिना तलाक दिए दूसरी शादी करने के बाद विवाद परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंचा था। वहां भी सप्ताह के सातों दिनों को दोनों पत्नियों के बीच तीन-तीन दिन तथा एक फ्री दिन बांटकर समझौते के जरिए मामला सुलझाया गया था।
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👉 फोटो- सांकेतिक
