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हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग और रंगदारी का जाल: गोरखपुर की अंशिका सिंह के कारनामों से उठा पर्दा
गोरखपुर, 24 जनवरी 2026.
गोरखपुर में खुद को सोशल मीडिया पर प्रभावशाली बताने वाली अंशिका सिंह अब पुलिस की गिरफ्त में है। गिरफ्तारी के बाद उसके कथित आपराधिक नेटवर्क और तरीकों को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में आरोप है कि अंशिका सिंह पिछले करीब पांच वर्षों से हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग, रंगदारी और अवैध गतिविधियों के जरिए सैकड़ों लोगों को अपने जाल में फंसाती रही।
पुलिस के अनुसार हरपुर बुदहट थाना क्षेत्र की रहने वाली अंशिका सिंह ने कथित तौर पर प्रेम और भरोसे की बातों में फंसाकर लोगों से नजदीकियां बढ़ाईं। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए आपत्तिजनक सामग्री रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल किया गया। कई मामलों में जबरन झूठे मुकदमे, पॉक्सो और दुष्कर्म के आरोपों की धमकी देकर पैसे वसूले गए। जांच में यह भी सामने आया है कि उसके संपर्क में कुछ पुलिसकर्मी भी रहे, जिनके नामों की जांच की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पहले अंशिका संतकबीरनगर के खलीलाबाद में किराए के मकान में रहती थी। आरोप है कि उसी दौरान वह अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाई गई। मकान खाली कराने को लेकर हुए विवाद के बाद मामला कानूनी स्तर तक पहुंचा। मकान मालकिन ने एक अधिवक्ता से संपर्क किया, जिन्होंने आरोप लगाया कि अंशिका के नेटवर्क में कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल रहे और वही लोग उसे संरक्षण देते थे।
गोरखपुर में 20 जनवरी को हुई बर्थडे पार्टी के दौरान रंगदारी और फायरिंग की घटना ने पूरे मामले को उजागर कर दिया। पुलिस के अनुसार बर्थडे सेलिब्रेशन के दौरान अंशिका का एक निजी अस्पताल के मैनेजर से विवाद हुआ। आरोप है कि उसने रंगदारी मांगते हुए मैनेजर की कनपटी पर पिस्टल लगा दी। छीना-झपटी के दौरान मैनेजर के दोस्त को गोली लग गई, जिसे गंभीर हालत में एम्स गोरखपुर में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
पुलिस द्वारा मोबाइल फोन की जांच में बड़ी संख्या में आपत्तिजनक वीडियो, कॉल रिकॉर्ड और चैट सामने आए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि वीडियो कॉल के जरिए न्यूड वीडियो दिखाकर लोगों को फंसाया जाता था और फिर ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठे जाते थे। हालांकि अब तक कई पीड़ितों ने लिखित शिकायत नहीं दी है, जिससे कुछ मामलों में जांच आगे नहीं बढ़ पाई है।
एसपी सिटी के अनुसार अंशिका का नाम पहले भी आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। अक्टूबर 2025 में दिल्ली से किराए पर ली गई थार गाड़ी वापस न करने और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूमने का मामला सामने आया था। जांच के दौरान गाड़ी से हरियाणा, बिहार और गोरखपुर की फर्जी नंबर प्लेट बरामद हुई थीं, जिसके बाद उसके कुछ साथियों को जेल भेजा गया था।
पुलिस का कहना है कि अंशिका सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय थी और उसने 700 से अधिक रील वीडियो पोस्ट किए थे। इन्हीं वीडियो के माध्यम से वह लोगों को आकर्षित कर अपने संपर्क में लाती थी। पुलिस अब उसकी कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और सोशल मीडिया नेटवर्क की गहन जांच कर रही है, ताकि पूरे गिरोह और उससे जुड़े लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
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