ऑन स्क्रीन रहकर कैसे रखें आंखों और शरीर को स्वस्थ…….

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स्क्रीन की दुनिया में सेहत की सुरक्षा: आंखों और शरीर को कैसे रखें स्वस्थ

आज का समय पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल स्क्रीन सामने होती है और रात को सोने से पहले आखिरी नजर भी उसी पर जाती है।

हर रोजमर्रा का कामकाज, पढ़ाई, मनोरंजन, खरीदारी—सब कुछ कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन पर सिमट गया है।

युवा हों या बच्चे, बुजुर्ग हों, पढ़ाई करने वाले छात्र या नौकरीपेशा लोग, लगभग हर उम्र के लोग दिन के कई घंटे ऑन-स्क्रीन बिताने को मजबूर हैं।

सबका एक ही सवाल रहता है कि इस बदलती जीवनशैली के साथ हम अपनी सेहत, खासकर आंखों की देखभाल कैसे करें।

मामले में विशेषज्ञ कहते हैं कि लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर सीधा असर पड़ता है। जलन, आंखों में दर्द, धुंधला दिखना, सिरदर्द, आंखों का सूखना और गर्दन-कमर में दर्द जैसी समस्याएं अब आम हो चुकी हैं। डॉक्टर इसे “डिजिटल आई स्ट्रेन” या “कंप्यूटर विजन सिंड्रोम” कहते हैं। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है।

⏩सबसे पहले बात आंखों की करें।

नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन देखते समय हमारी पलकें सामान्य से कम झपकती हैं, जिससे आंखें सूखने लगती हैं। इससे बचने के लिए हमें जानबूझकर बार-बार अपनी पलकें झपकाने की आदत डालनी चाहिए। इसके साथ ही 20-20-20 नियम बेहद कारगर माना जाता है। मतलब हर 20 मिनट बाद स्क्रीन से नजर हटाकर 20 फीट दूर किसी चीज़ को कम से कम 20 सेकंड तक देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है।

📍स्क्रीन की ब्राइटनेस और कंट्रास्ट भी आंखों की सेहत में अहम भूमिका निभाते हैं। बहुत तेज या बहुत कम रोशनी दोनों ही आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। स्क्रीन की रोशनी कमरे की लाइट के अनुसार रखें। अंधेरे कमरे में तेज ब्राइटनेस पर मोबाइल या लैपटॉप चलाना आंखों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है, हो सके तो मोबाइल का स्क्रीन रीडिंग मोड पर रखें ।

यहां यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि मोबाइल और लैपटॉप का सही पोजिशन भी जरूरी है। स्क्रीन आंखों के स्तर से थोड़ी नीचे होनी चाहिए, ताकि आंखों को ऊपर की ओर ज्यादा न देखना पड़े। मोबाइल को आंखों से बहुत पास रखकर देखने की आदत से बचना चाहिए।

बच्चों में मोबाइल को बिल्कुल चेहरे के पास रखकर देखने की यह आदत खासतौर पर तेजी से बढ़ रही है, जो भविष्य में आंखों की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।

👉आंखों के साथ-साथ शरीर की सेहत पर भी स्क्रीन का असर पड़ता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने से गर्दन, कंधे और कमर में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। हर एक घंटे में कम से कम पांच मिनट का ब्रेक लेकर खड़े होना, हल्की स्ट्रेचिंग करना या थोड़ा टहल लेना शरीर को राहत देता है।

हमारा खान-पान भी आंखों की सेहत से सीधे जुड़ा होता है। हरी सब्जियां, गाजर, पालक, टमाटर, आंवला, संतरा जैसे फल-सब्जियों में मौजूद विटामिन ए, सी और ई आंखों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इसके अलावा पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, ताकि शरीर और आंखों में नमी बनी रहे। हमें समय से सोना चाहिए और भरपूर मात्रा में नींद लेना भी जरूरी है,नींद पूरी न होने पर भी आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद को आदत में शामिल करना चाहिए।

💥👉बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण और भी जरूरी है। बच्चों को पढ़ाई के अलावा मोबाइल या टैबलेट का सीमित इस्तेमाल ही करने देना चाहिए और बीच-बीच में आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करना चाहिए। बुजुर्गों को भी मोबाइल का उपयोग करते समय फॉन्ट साइज बड़ा रखने और आंखों को बार-बार आराम देने की सलाह दी जाती है।

सारी सावधानियां बरतने के बाद भी यदि आंखों में लगातार दर्द, जलन या धुंधलापन बना रहता है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें । समय-समय पर आंखों की जांच कराना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद जरूरी है। एक छोटी सी शुरुआती सावधानी ही बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

अब जबकि इस डिजिटल युग से दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन सही आदतें अपनाकर इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक सीमित किया जा सकता है। थोड़ी-सी सतर्कता और नियमित देखभाल से हम स्क्रीन के साथ भी स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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