महाशिवरात्रि:अंधकार पर चेतना की विजय, शिव–शक्ति के शाश्वत मिलन का महापर्व…….

💥 15 फरवरी 2026 महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष

महाशिवरात्रि 2026: अंधकार पर चेतना की विजय, शिव–शक्ति के शाश्वत मिलन का महापर्व

महाशिवरात्रि सनातन परंपरा का वह दिव्य पर्व है, जो के निराकार–साकार स्वरूप, तप–त्याग, करुणा–संहार और सृष्टि–संतुलन के गूढ़ रहस्यों को एक ही रात में समेटे हुए है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाएगी। यह केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण, आत्मसंयम और अंतर्मुखी चेतना का पर्व है—जहाँ साधना, व्रत, जागरण और अभिषेक के माध्यम से जीवन में संतुलन साधा जाता है।


महाशिवरात्रि का मूल भाव: क्यों ‘रात्रि’ है यह पर्व?

सनातन दर्शन में ‘रात्रि’ केवल अंधकार नहीं, बल्कि अंतर्मन की यात्रा का प्रतीक है। मान्यता है कि इस रात उत्तरी गोलार्ध में आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर तीव्र होता है, जिससे ध्यान, जप और जागरण अधिक फलदायी होते हैं। यही कारण है कि महाशिवरात्रि पर रात्रि-जागरण का विशेष महत्व बताया गया है—यह बाहरी शोर से हटकर भीतर की चेतना को जगाने की साधना है।


पौराणिक इतिहास और प्रमुख मान्यताएँ

1. शिव–पार्वती विवाह: प्रेम और गृहस्थ जीवन का आदर्श

कई परंपराओं के अनुसार, इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। यह प्रसंग बताता है कि तपस्वी शिव गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर करुणा, प्रेम और उत्तरदायित्व का संतुलन स्थापित करते हैं। इसीलिए यह पर्व दांपत्य जीवन में सौहार्द और स्थिरता का भी प्रतीक है।

2. समुद्र मंथन और नीलकंठ की कथा

समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष ने समस्त सृष्टि को संकट में डाल दिया। तब शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और स्वयं कष्ट सहकर जगत की रक्षा की। इसी कारण वे नीलकंठ कहलाए। यह घटना त्याग, करुणा और सार्वभौमिक कल्याण की चरम अभिव्यक्ति है।

3. अग्नि स्तंभ और ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य

शिव पुराण के अनुसार, इसी दिन शिव अनंत प्रकाशमान अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा और विष्णु उस स्तंभ की आदि–अंत खोजने निकले, पर असफल रहे—यह प्रसंग बताता है कि शिव अनादि–अनंत हैं, जिन्हें तर्क से नहीं, साधना से जाना जाता है।

4. तांडव नृत्य: सृष्टि का लय–ताल

महाशिवरात्रि को शिव के तांडव का स्मरण किया जाता है—यह नृत्य सृष्टि, पालन और संहार के चक्र का प्रतीक है। संदेश स्पष्ट है: परिवर्तन शाश्वत है, और संतुलन ही जीवन का सत्य।


आध्यात्मिक महत्व: साधना की सर्वोत्तम रात्रि

इस रात उपवास, मौन, ध्यान और मंत्र-जप से मन की चंचलता शांत होती है। कहा जाता है कि इस साधना से ऊर्जा का प्रवाह मूलाधार से सहस्रार की ओर उर्ध्वगामी होता है, जो आत्मिक शांति और अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। यही कारण है कि योगी और साधक इस रात्रि को अत्यंत पावन मानते हैं।


महाशिवरात्रि की पूजा-विधि: श्रद्धा और शुद्धता का क्रम

स्नान, संकल्प और अभिषेक

प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
मान्यता है—

  • जल से मानसिक शांति
  • दूध से संतान-सुख
  • शहद से शत्रु-नाश
  • घी से तेज और समृद्धि
  • पंचामृत से सर्वसिद्धि की प्राप्ति होती है

पूजा-सामग्री

बेलपत्र, शमी पत्र, बेर, धतूरा, भांग, गंगाजल, चंदन, कुमकुम, धूप–दीप और पुष्प अर्पित करें।
बेलपत्र शिव को विशेष प्रिय है—त्रिदल बेलपत्र त्रिगुणों पर विजय का प्रतीक माना गया है।

चार पहर की पूजा

रात्रि में चार पहर शिव-पूजन और रुद्राभिषेक करने की परंपरा है—यह साधना को क्रमबद्ध और गहन बनाती है।


महाशिवरात्रि पर क्या न करें

  • शिवलिंग पर तुलसी, केतकी का फूल या हल्दी अर्पित न करें
  • उबले दूध का प्रयोग अभिषेक में वर्जित माना गया है
  • व्रत और पूजा में अहंकार, क्रोध और असंयम से बचें

सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराएँ

देशभर में मंदिरों में भव्य सजावट होती है। काशी विश्वनाथ, अरुणाचलेश्वर जैसे शिवधामों में विशेष अनुष्ठान, रात्रि-जागरण, भजन–कीर्तन और अभिषेक होते हैं। भक्त पूरी रात “ॐ नमः शिवाय” के जप में लीन रहते हैं—यह सामूहिक साधना समाज को भी एक सूत्र में बांधती है।


महाशिवरात्रि का संदेश: आज के जीवन के लिए क्या सीख?

महाशिवरात्रि हमें सिखाती है कि—

  • त्याग में ही रक्षा है (नीलकंठ की कथा)
  • तप और प्रेम का संतुलन ही जीवन की पूर्णता है (शिव–पार्वती विवाह)
  • परिवर्तन को स्वीकारना ही शांति का मार्ग है (तांडव)
  • अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा साधना से होती है (ज्योतिर्लिंग)

महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता का निमंत्रण है। यह रात्रि हमें भीतर उतरकर अपने अंधकार, भय और विकारों का सामना करना सिखाती है—और शिव-तत्व के सहारे संतुलन, शांति और करुणा के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *