एम्स गोरखपुर में पहली बार जटिल ऑर्थोग्नाथिक सर्जरी से युवक को मिला नया जीवन…….

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एम्स गोरखपुर में पहली बार जटिल ऑर्थोग्नाथिक सर्जरी से युवक को मिला नया जीवन

गोरखपुर।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर के दंत शल्य विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार अत्यंत जटिल ऑर्थोग्नाथिक फेशियल सर्जरी द्वारा जन्मजात चेहरे की गंभीर विकृति से पीड़ित युवक का सफल उपचार किया गया है।

यह सर्जरी देश के गिने-चुने बड़े चिकित्सा संस्थानों में ही संभव होती है। इस शल्य प्रक्रिया से जबड़े का विकास, चेहरे का संतुलन, श्वसन मार्ग का सुधार तथा सौंदर्यात्मक संरचना को पुनः स्थापित किया जाता है।

➡️कुशीनगर जनपद के बालुही निवासी 22 वर्षीय युवक पिछले 15 वर्षों से टीएमजे एंकायलोसिस (TMJ Ankylosis) से पीड़ित था। इस रोग में जबड़े की हड्डियां खोपड़ी से जुड़ जाती हैं, जिससे मुंह खुलना बंद हो जाता है। साथ ही उसका निचला जबड़ा पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाया था। इस कारण युवक को भोजन करने, सांस लेने और सोने में अत्यधिक कठिनाई होती थी तथा वह कुपोषण का शिकार हो गया था।

चिकित्सकीय जांच में युवक को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) की समस्या भी पाई गई, जिससे उसका चेहरा पक्षी के समान दिखाई देने लगा था, जिसे चिकित्सा भाषा में बर्ड फेस डिफॉर्मिटी कहा जाता है।

➡️दो चरणों में हुआ उपचार

दंत चिकित्सा विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. शैलेश कुमार के नेतृत्व में उपचार को दो चरणों में किया गया।

➡️पहले चरण में (अप्रैल 2025) इंट्राओरल डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस तकनीक का प्रयोग किया गया। इस प्रक्रिया में विशेष विधि से निचले जबड़े में एक उपकरण (डिस्ट्रैक्टर) लगाया गया, जिसे प्रतिदिन लगभग एक मिलीमीटर घुमाया गया। इससे धीरे-धीरे नई हड्डी बनने लगी और जबड़ा आगे आने लगा। परिणामस्वरूप युवक की सांस लेने की क्षमता में सुधार हुआ तथा खर्राटों की समस्या में कमी आई।

➡️दूसरे चरण में (जनवरी 2026) डिस्ट्रैक्टर को निकालकर खोपड़ी और जबड़े की जुड़ी हुई हड्डियों को अलग किया गया (गैप आर्थ्रोप्लास्टी)। साथ ही चेहरे के संतुलन के लिए स्लाइडिंग जीनियोप्लास्टी द्वारा ठोड़ी को नया आकार दिया गया। यह ऑपरेशन नई तकनीक से कान के पास छोटे चीरे द्वारा लगभग पांच घंटे में सफलतापूर्वक किया गया।

➡️सामान्य जीवन की ओर वापसी

ऑपरेशन के बाद युवक का जबड़ा आगे आ गया है, जिससे श्वसन मार्ग (फैरिंजियल स्पेस) बढ़ गया है। अब वह बिना कठिनाई के सांस ले सकता है, भोजन कर सकता है और शांतिपूर्वक नींद ले पा रहा है। जहां पहले उसकी ठोड़ी गर्दन से जुड़ी प्रतीत होती थी, अब वहां स्पष्ट और संतुलित जबड़ा दिखाई देता है।

➡️चिकित्सकीय टीम को बधाई

इस जटिल शल्य चिकित्सा में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संतोष शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सीमा, रेजिडेंट डॉ. आशुतोष तथा नर्सिंग ऑफिसर पंकज व प्रतिभा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दंत विभाग के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. प्रवीण कुमार एवं जूनियर रेजिडेंट डॉ. सुमित, डॉ. सौरभ तथा डॉ. प्रियंका त्रिपाठी ने सहयोग किया।

➡️संस्थान की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता एम्स गोरखपुर की उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस उपलब्धि से क्षेत्र के लोगों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेगी।

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