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रमजान में शुगर और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए सावधानी जरूरी, सही खान-पान और निगरानी से सुरक्षित रह सकता है रोजा
बस्ती, 19 फरवरी 2026.
रमजान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है और इस दौरान बड़ी संख्या में लोग रोजा रखते हैं। लेकिन मधुमेह (डायबिटीज) और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित मरीजों के लिए रोजा रखना एक चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही खान-पान, दवाओं के उचित समय और नियमित निगरानी के जरिए ऐसे मरीज भी सुरक्षित और स्वस्थ रह सकते हैं, लेकिन लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
चिकित्सकों के अनुसार, रोजा के दौरान लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से शरीर में ग्लूकोज और रक्तचाप के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसे में सहरी और इफ्तार का सही चुनाव सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सहरी को यथासंभव देर से करना चाहिए ताकि शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती रहे। सहरी में फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन जैसे दलिया, ओट्स, साबुत अनाज, दही, अंडा, हरी सब्जियां और फल शामिल करना लाभदायक माना जाता है। यह भोजन धीरे-धीरे ऊर्जा देता है और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
इफ्तार के समय रोजा खजूर और पानी से खोलना परंपरागत और स्वास्थ्य के लिहाज से भी उचित माना जाता है, लेकिन इसके बाद अचानक अधिक मीठा, तला-भुना या नमकीन भोजन करना खतरनाक हो सकता है। समोसे, पकौड़े, मीठे शरबत और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों को तेजी से बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इफ्तार में संतुलित भोजन जैसे दाल, सब्जी, सलाद, फल और हल्का प्रोटीन युक्त आहार लिया जाए।
रमजान के दौरान शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक बड़ी समस्या बन सकती है, जो ब्लड प्रेशर और शुगर दोनों को प्रभावित करती है। इसलिए इफ्तार से सहरी के बीच कम से कम 2 से 3 लीटर पानी पीना जरूरी है। चाय, कॉफी और सॉफ्ट ड्रिंक जैसे कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकते हैं।
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए दवाओं का सही समय भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टरों के अनुसार, रोजा के दौरान दवा के समय में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। आमतौर पर दिन की दवा इफ्तार में और रात की दवा सहरी में ली जाती है, लेकिन यह बदलाव केवल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। बिना परामर्श दवा के समय में बदलाव करना खतरनाक साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नियमित निगरानी पर भी जोर दिया है। रोजा के दौरान दिन में 2 से 3 बार ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच करना सुरक्षित माना जाता है। यदि शुगर का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाए या बहुत कम हो जाए, या मरीज को चक्कर, कमजोरी, अत्यधिक प्यास, धुंधला दिखना या तेज सिरदर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत रोजा तोड़कर पानी या इलेक्ट्रोलाइट्स लेना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
इसके अलावा, भारी शारीरिक गतिविधि से बचना चाहिए क्योंकि इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हल्की सैर, सामान्य दैनिक गतिविधियां और तरावीह की नमाज जैसी हल्की शारीरिक गतिविधियां सुरक्षित मानी जाती हैं। पर्याप्त नींद लेना भी ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चिकित्सकों का मानना है कि रमजान आध्यात्मिक शुद्धता और अनुशासन का महीना है, लेकिन स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। सही खान-पान, पर्याप्त पानी, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करके मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज भी सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से रोजा रख सकते हैं।
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