RTI का जवाब ना देना बड़ा भारी-चार अधिकारियों पर लगा 25-25 हजार का जुर्माना…….

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💥सिद्धार्थनगर में RTI की अनदेखी पड़ी भारी: चार अधिशासी अधिकारियों पर 25-25 हजार का जुर्माना


सिद्धार्थनगर, 28 मार्च 2026.

जनपद में सूचना का अधिकार अधिनियम की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने बांसी, सोहरतगढ़, उसका बाजार और सिद्धार्थनगर नगर निकायों के चार अधिशासी अधिकारियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध न कराने और आयोग के निर्देशों की अवहेलना करने पर की गई है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब बस्ती निवासी सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नगर निकायों से विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। आरोप है कि संबंधित कार्यालयों द्वारा समय पर सूचना नहीं दी गई, जिससे आवेदक को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े और मानसिक व आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सूचना न मिलने पर आवेदक ने राज्य सूचना आयोग में अपील की। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जन सूचना अधिकारियों को कई बार निर्देश जारी कर सूचना उपलब्ध कराने का अवसर दिया, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों ने न तो संतोषजनक जवाब दिया और न ही सुनवाई के दौरान अपेक्षित सहयोग किया।
आयोग ने इसे लापरवाही और अधिनियम की अवमानना मानते हुए चारों अधिशासी अधिकारियों पर व्यक्तिगत रूप से 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आदेश के अनुसार यह राशि सीधे उनके वेतन से काटी जाएगी, जिससे यह स्पष्ट संकेत गया है कि RTI कानून के प्रति उदासीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद नगर निकायों में हड़कंप की स्थिति है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच यह संदेश स्पष्ट रूप से गया है कि सूचना का अधिकार केवल कागजी कानून नहीं, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत होगा। साथ ही यह अन्य विभागों के लिए भी चेतावनी है कि वे RTI जैसे महत्वपूर्ण कानून का पालन गंभीरता से करें।
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