देश में दो ही खलनायक सवर्ण और मुसलमान- बृजभूषण शरण सिंह…….

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रामनवमी के मंच से उठी सियासी चिंगारी: बृजभूषण शरण सिंह के बयान ने बढ़ाई बहस

पटना, 28 मार्च 2026.

📍 रामनवमी के धार्मिक उत्साह के बीच बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। भाजपा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह का एक भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दिए गए उनके शब्दों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

📍रामनवमी के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में बृजभूषण शरण सिंह ने देश की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान समय में दो वर्ग ऐसे हैं, जिन्हें समाज में ‘खलनायक’ के रूप में देखा जा रहा है, एक मुसलमान और दूसरा सवर्ण | यही नहीं उन्होंने कई बार सवर्ण शब्द का उच्चारण भी किया |उनके इस बयान ने मंच से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी।

अपने भाषण में उन्होंने राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई पार्टियां मुसलमानों के पक्ष में खड़ी नजर आती हैं, लेकिन सवर्णों लिए कोई स्पष्ट आवाज सामने नहीं आती। उन्होंने श्रोताओं से सीधा सवाल किया कि आखिर कौन-सी राजनीतिक ताकत उन लोगों के साथ खड़ी है, जिन्हें वे उपेक्षित मानते हैं। इस सवाल पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया भी सामने आई, जिसने पूरे माहौल को और गंभीर बना दिया।

📍बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी बात को और प्रभावी बनाने के लिए एक शेर का सहारा लिया। उन्होंने कहा, “इतने गहरे घाव कहां से आए होंगे, लगता है तुमने भी दोस्त बनाए होंगे।” इस पंक्ति के जरिए उन्होंने समाज के भीतर पनप रही जटिलताओं और रिश्तों की बदलती प्रकृति की ओर इशारा किया।

हालांकि, अपने भाषण के अंत में उन्होंने संतुलन साधने की कोशिश भी की। रामनवमी के अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि राम का जीवन समावेश और समानता का संदेश देता है। उन्होंने ऋषि भारद्वाज, केवट, वनवासी और आदिवासी समाज का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज को जोड़ने की जरूरत है, न कि बांटने की।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बयानबाजी पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में इस बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है—जहां एक ओर समर्थक इसे ‘सच्चाई की आवाज’ बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे समाज को विभाजित करने वाला बयान मान रहे हैं।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न वर्गों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, और यह मुद्दा आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है।

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