दो महीने के अंदर फूल छोड़ हाथी पर बैठे और अब आ गए साइकिल की सवारी करने

जी पी दुबे
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दो महीने के अंदर दयाशंकर मिश्र ने बदली तीसरी पार्टी थामा सपा का दामन

बस्ती 15 मई 24.
राजनीतिक महत्वाकांक्षा आदमी को क्या से क्या बना देती है और कहां से कहां पहुंचा देती है |
लगभग 2 महीने पहले 35 साल भाजपा में बिता कर दयाशंकर मिश्र ने टिकट की चाहत में भाजपा छोड़ बसपा का दामन थामा था और भाजपा में अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया था| बहुजन समाज पार्टी नें उन्हें अपना उम्मीदवार भी बनाया था और दयाशंकर मिश्र द्वारा 1 मई बसपा उम्मीदवार के रूप में बस्ती लोकसभा सीट से नामांकन भी किया गया |
दयाशंकर मिश्र द्वारा चुनाव प्रचार भी किया जा रहा था और नामांकन के अंतिम दिन के एक दिन पहले उन्होंने पूरी जिंदगी बहुजन समाज पार्टी नाच हो छोड़ने का वादा भी किया था | परंतु नामांकन के अंतिम दिन पूर्व विधायक नंदू चौधरी के बेटे लव कुश पटेल ने बसपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया तथा पार्टी द्वारा उन्हें सिंबल भी प्रदान कर दिया गया |
इससे आहत दयाशंकर मिश्र ने एक दिन पहले बसपा ना छोड़ने के वादे पर पुनर्विचार करना चालू कर दिया |
उनकी रुख से यह पहले ही पता चल गया था कि वह भाजपा में घर वापसी ना करके समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे और अंत में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के समक्ष उन्होंने प्रदेश कार्यालय पर समाजवादी पार्टी का हाथ पकड़ लिया |
यहां यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा में विचारधारा का कोई महत्व नहीं है |
और यही बात पूर्ण रूप से दयाशंकर मिश्र पर भी लागू होती है |
उनकी समाजवादी पार्टी ज्वाइन करते समय विधायक तथा समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष महेंद्र कुमार यादव भी मौजूद रहे |

बहरहाल समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने के बाद कल जब वह बस्ती आएंगे तो उनका जोरदार स्वागत करने के लिए तैयारी कर रही है |

दयाशंकर मिश्र के सपा जॉइन करने के बाद बस्ती में एक बार फिर सियासी पारा गरम हो गया है |

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