जाति जनगणना पर… नेहरू अंबेडकर लोहिया के विचार

जाति जनगणना और.. गांधी लोहिया अंबेडकर के विचार

बस्ती 10 सितंबर 24.

एक तरफ तो शहरों में जातिवाद का ताना-बाना छिन्न भिन्न हो रहा है, समाज धीरे-धीरे आपस में एक हो रहा है घुल मिल रहा है |

वहीं राजनीतिक पार्टिया अपनी राजनीति को चमकाने के लिए जाति जनगणना का मुद्दा उठाकर सामाजिक ताने-बाने को एक बार फिर से छिन्न-भिन्न और टकराव की तरफ ले जाती दिख रही हैं |
और जो वर्ग इस जाति जनगणना को लेकर उत्साह में है उसका अब इस मुद्दे से वापस लौटना असंभव लग रहा है
हमारे देश में दूसरे विश्व युद्ध के चलते जब 1941 में जनगणना नहीं हुई और 1991 में जब आजादी के बाद पहली बार जगत करना हो रही थी तब भी जाति को आधार मानकर जनगणना करने की मांग उठी थी |
तो उसे समय गृह मंत्री रहे सरदार पटेल ने साफ इनकार करते हुए कहा था कि जाति जनगणना देश के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ सकती है

और उनकी बात का समर्थन प्रधानमंत्री नेहरू, अंबेडकर और मौलाना आजाद ने भी किया था

और आज उन्हीं को अपना आदर्श मानने वाले उनके राजनीतिक वंशज अपनी राजनीति को बढ़ाने के चक्कर में देश में जाति जनगणना को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं और इसकी मांग कर रहे हैं |

जाति जनगणना को लेकर विपक्ष जहां हमलावर है वही इस मुद्दे पर भाजपा शांत हो जाती है |

कांग्रेस नेता राहुल गांधी हर सभा में जाती जनगणना का मुद्दा उठाते हैं | और जी गांधी के कांग्रेस की वह बात करते हैं कि वह मेरी पार्टी है वही गांधी ने 1930 में कहा था की जात जनगणना करवा कर हम देश के ताने-बाने को छिन्न-बिन नहीं करना चाहते | गांधी की सोच सर्व समाज के एक समान करने की थी | वही उनका अनुसरण करने का दम्भ भरने वाले राहुल गांधी उसके खिलाफ जाट जनगणना की बात करते हैं |

सपा प्रमुख अखिलेश यादव जो खुद को दुनिया के विचारधारा का बताते हैं |
जाति जनगणना पर आखिर लोहिया की क्या राय थी उसको भी जानना बहुत जरूरी है|
डॉ राम मनोहर लोहिया की जाति को लोग लेकर विशेष सोच थी उन्होंने लिखा है कि जाति प्रणाली परिवर्तन के खिलाफ स्थिरता की जबरदस्त शक्ति है, यह शक्ति झुद्रता का और झूठ को स्थिरता प्रदान करती है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नें जाति जनगणना पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि समाज का वह वर्ग जो पिछड़ा है उसको समाज के समान धारा में लाने के लिए जाति जनगणना होनी चाहिए केवल राजनीति करने के लिए नहीं

यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विचारों को भी जाना जरूरी है कि वह सभी हिंदुओं को जात-पात से उठाकर एक समान श्रेणी में लाने कार्य में लगा हुआ है |

भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो उसकी स्थापना राजनीतिक हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की वैचारिक बुनियाद पर बनी है | पार्टी का समर्थक हर उसे मुद्दे पर इस तरह का क्रियांवन्यन चाहता है जिस मुद्दे पर पार्टी की राजनीतिक बुनियाद तैयार हुई है |
जब भी पार्टी का कर मुद्दों से विचलन होता है या क्षणिक दबाव में आती है तो उसका समर्थन कभी गुस्से से कभी हताशा से भर जाता है |
जाट जनगणना पर भाजपा अगर पशु पीस में दिख रही है तो उसके पीछे उसका कोर समर्थक का दबाव ही दिखता है|
लेकिन जाट जनगणना पर आए राष्ट्रीय स्वयंसेवक के विचार ने उसकी राह थोड़ी आसान जरूर की है |

इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो लगातार हिंदुत्व की बात करते हैं |
उनके द्वारा आगरा में हाल ही में दिए गए भाषण में जो कहा की मौजूदा राजनीति जो जातिवाद और आरक्षण के इर्द-गिर्द घूम रही मौजूदा राजनीति का जवाब भी है |
योगि नें कहां की बटेंगे तो कटेंगे
उनका इशारा बांग्लादेश में शेख हसीना के पद से हटने के बाद हुये हिंदुओं के ऊपर हमले
के संदर्भ में है |

योगी आदित्यनाथ की भाषा थोड़ी सख्त जरूर है लेकिन वह देश के बहुत संख्यक समाज को संदेश दे रहे हैं |
एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो मां रहा है कि योगी एक तरह से हिंदू समाज के एकीकरण की बात करके राहुल अखिलेश और तेजस्वी की सियासी काट का नया फॉर्मूला पेश कर रहे हैं |

एक तरफ जाति जनगणना पर योगी का विचार दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परोक्ष स्वीकृति भाजपा बीच का कोई रास्ता निकालने की जुगत में है|

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