IAS नियाज खान का बड़ा बयान — ‘भारतीय मुसलमान पहले हिंदुओं को भाई मानें, फिर अरब वालों को’


भोपाल: IAS नियाज खान का बड़ा बयान — ‘भारतीय मुसलमान पहले हिंदुओं को भाई मानें, फिर अरब वालों को’

भोपाल, 17 फरवरी 2025 — मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी नियाज खान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। खान ने कहा कि भारत में पहले सभी हिंदू थे, इस्लाम बाद में अरब से आया। इसलिए भारतीय मुसलमानों को पहले हिंदुओं को अपना भाई मानना चाहिए, फिर अरब वालों को।

‘सभी भारतीयों के जीन एक जैसे’
नियाज खान ने अपने पोस्ट में आनुवंशिक समानता और सांस्कृतिक जड़ों की बात करते हुए कहा कि भारतीयों के जीन एक जैसे हैं, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। उन्होंने जोर दिया कि राष्ट्र को प्राथमिकता देनी चाहिए और मानवता को सबसे ऊपर रखना चाहिए। खान ने स्पष्ट किया कि वे एक लेखक और विचारक हैं, न कि राजनेता।

‘इस्लाम अरब का धर्म है’
अपने पोस्ट में खान ने लिखा, ‘इस्लाम तो अरब का धर्म है। यहां तो सभी हिंदू थे। हिंदू से लोग मुस्लिम बनाए गए थे। इसलिए भले ही धर्म अलग-अलग हों, लहू तो एक है। सभी एक संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। अगर जो मुस्लिम अरब के लोगों को आदर्श मानते हैं, वे पुनर्विचार करें। सर्वप्रथम हिंदुओं को अपना भाई मानें, बाद में अरब को।’

‘हिंदू और मुसलमानों की जड़ें एक’
खान ने आनुवंशिकी का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस्लाम भारत में 1500 साल पहले आया, लेकिन जीन कभी नहीं बदले। उनका मानना है कि सभी भारतीयों की उत्पत्ति एक ही जगह से हुई है। समय के साथ लोगों ने अलग-अलग धर्म अपना लिए, लेकिन मूल रूप से सभी भारतीय भाई-बहन हैं। उन्होंने हिंदू और मुसलमानों को एक ही पेड़ की दो शाखाएं बताया, जिसकी जड़ें एक हैं।

‘भारत को प्राथमिकता देनी चाहिए, अरब को नहीं’
नियाज खान ने यह भी कहा कि कुछ भारतीय मुसलमान अरब के मुसलमानों को अधिक महत्व देते हैं, जबकि हमें अपने देश को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें अरब के मुसलमानों के साथ अच्छे संबंध रखने चाहिए, लेकिन भारतीय विद्वान ही हमारे आदर्श होने चाहिए, अरब के नहीं। हिंदू हमारे भाई हैं, चाहे धर्म अलग हो।’

सामाजिक और राजनीतिक हलकों में हलचल
नियाज खान के इस बयान के बाद से सोशल मीडिया पर उनके समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कुछ लोगों ने उनके विचारों की सराहना की, तो कुछ ने इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश बताया।

NGV PRAKASH NEWS


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