
पूर्णिया में डेढ़ सौ हिंदू परिवारों का रास्ता बंद, हालात गंभीर, प्रशासन से गुहार
पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के बायसी प्रखंड के शादीपुर भुटहा गांव में एक गंभीर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। यहां करीब 150 हिंदू परिवारों का अपने ही घर तक पहुंचने का रास्ता बंद कर दिया गया है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। मामला तब और जटिल हो गया जब एसडीएम कोर्ट ने हिंदू परिवारों के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन सिविल कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया।
रास्ता बंद, शादी-ब्याह और अस्पताल तक जाने में दिक्कत
शर्मा टोली गांव के लोगों का कहना है कि गांव तक कोई सरकारी सड़क नहीं है, इसलिए वे वर्षों से निजी जमीन से होकर गुजरते थे। लेकिन अब मुस्लिम पक्ष ने महज 12 डिसमिल जमीन की आड़ में 100 मीटर लंबा रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया। इससे गांव के लोगों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी में कई संकट खड़े हो गए हैं—
- शादी-ब्याह रुक गए – रास्ता बंद होने के कारण लड़के-लड़कियों की शादी नहीं हो पा रही। बारात और रिश्तेदारों के आने-जाने में दिक्कतें हो रही हैं।
- बीमारों का अस्पताल पहुंचना मुश्किल – किसी के बीमार पड़ने पर अस्पताल तक ले जाना कठिन हो गया है। एम्बुलेंस भी गांव में नहीं पहुंच सकती।
- बच्चों की पढ़ाई पर असर – स्कूल जाने वाले बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। लंबे रास्ते से स्कूल जाने में परेशानी हो रही है।
- धार्मिक गतिविधियों पर भी विवाद – ग्रामीणों का आरोप है कि मुस्लिम पक्ष ने न सिर्फ रास्ता बंद किया बल्कि लाउडस्पीकर और पूजा-पाठ करने पर भी रोक लगाने की कोशिश की। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इस आरोप को राजनीति से प्रेरित बताया है।
पहले पैसे लिए, फिर लौटा दिए – पीड़ितों का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने रास्ते के लिए जमीन मालिक को ₹1 लाख दिए थे। लेकिन बाद में मुस्लिम समाज के दबाव के कारण जमीन मालिक ने पैसे लौटा दिए और रास्ता देने से इनकार कर दिया। अब स्थिति यह है कि गांव चारों ओर से घिर गया है और आने-जाने का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं बचा।
एसडीएम ने रास्ता देने का आदेश दिया, लेकिन सिविल कोर्ट ने पलटा फैसला
रास्ता दिलाने के लिए ग्रामीणों ने पहले एसडीएम कोर्ट में अर्जी दी थी। एसडीएम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और रास्ता देने का आदेश दिया। लेकिन इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने सिविल कोर्ट में अपील की, जहां से मामला उनके पक्ष में चला गया।
अब ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार से न्याय की गुहार लगाई है।
प्रशासन का क्या कहना है?
बायसी की एसडीएम कुमारी तौसीन का कहना है कि अगर 100 से अधिक परिवार किसी जगह पर रहते हैं, तो उनके रास्ते को बंद नहीं किया जा सकता, भले ही वह निजी जमीन पर ही क्यों न हो। लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस और अंचल अधिकारी को कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन समाधान नहीं निकल सका।
मुखिया का दावा – दूसरा रास्ता लेने को तैयार नहीं हिंदू पक्ष
गांव के मुखिया सबनूर आलम का कहना है कि जमीन निजी है, इसलिए मालिक रास्ता नहीं देना चाहते। उन्होंने यह भी दावा किया कि हिंदू परिवारों को दूसरी तरफ से रास्ता देने की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। साथ ही, उन्होंने लाउडस्पीकर और पूजा-पाठ पर रोक के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि कुछ लोग इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।
रास्ते का विवाद अब राजनीति के घेरे में
इस विवाद ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या उन 150 हिंदू परिवारों की है, जो रास्ता नहीं होने के कारण परेशान हैं।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब तक इस विवाद को हल कर पाता है और क्या इन सैकड़ों परिवारों को फिर से अपने घर तक जाने का अधिकार मिल पाएगा?
NGV PRAKASH NEWS

