
नोएडा में पॉर्न रैकेट का भंडाफोड़, करोड़ों की विदेशी फंडिंग का हुआ खुलासा
नोएडा में एक बड़े पॉर्न रैकेट का खुलासा हुआ है। दिल्ली से सटे इस हाई-प्रोफाइल इलाके में पिछले पांच साल से गुपचुप तरीके से अश्लील वीडियो बनाए और विदेश भेजे जा रहे थे। यह अवैध स्टूडियो नोएडा के सेक्टर-105 की एक पॉश कोठी में संचालित हो रहा था, जो दिल्ली के एक डॉक्टर के नाम पर रजिस्टर्ड है।
गुप्त स्टूडियो से विदेश तक अश्लील कारोबार
आरोपी उज्ज्वल किशोर और उसकी पत्नी नीलू श्रीवास्तव ने इस कोठी को किराए पर लेकर एक हाई-टेक स्टूडियो तैयार किया था। यहां लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधाएं मौजूद थीं। स्टूडियो में तैयार किए गए अश्लील वीडियो को विदेशी वेबसाइटों को बेचा जाता था।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कोठी का गेट केवल लड़कियों और कैमरा उपकरण लाने वालों के लिए ही खुलता था। हालांकि, उन्हें इस बात की भनक नहीं थी कि भीतर पॉर्नोग्राफी से जुड़ी गतिविधियां हो रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान यहां से तीन लड़कियां भी बरामद हुईं, जिनके बयान दर्ज किए गए हैं।
विदेश से करोड़ों की फंडिंग
जांच में सामने आया है कि किशोर और नीलू ने ‘सबडिजी’ नाम की एक कंपनी बनाई थी, जिसके जरिए वे विदेशी एडल्ट वेबसाइट्स को अश्लील कंटेंट सप्लाई कर रहे थे। ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, इस कंपनी के बैंक खातों में अब तक 15.66 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग आ चुकी थी। इसके अलावा, विदेशी बैंक में एक खाते में सात करोड़ रुपये जमा किए गए थे, जिसे बाद में कैश किया गया। पूछताछ में दंपती ने बताया कि यह पैसा मार्केट रिसर्च, जनमत संग्रह और विज्ञापन के नाम पर आया था, लेकिन जांच में यह दावा गलत साबित हुआ।
लड़कियों को फंसाने का जाल
मॉडलिंग और एक्टिंग में करियर बनाने की चाह रखने वाली युवतियों को आकर्षक विज्ञापनों के जरिए फंसाया जाता था। उन्हें हर महीने लाखों रुपये कमाने का लालच दिया जाता, फिर इस अश्लील कारोबार में धकेल दिया जाता था। जो लड़कियां इन वीडियो में काम करती थीं, उन्हें कमाई का केवल 25% हिस्सा दिया जाता था, जबकि बाकी मुनाफा उज्ज्वल किशोर और नीलू श्रीवास्तव के पास जाता था।
पॉर्न की लत: खतरे की घंटी
भारत में पॉर्न निर्माण, वितरण और प्रदर्शन पर प्रतिबंध है, बावजूद इसके देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉर्न उपभोक्ता है। छोटे शहरों में भी इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। 2018 में सरकार ने 850 पॉर्न वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन यह रोक ज्यादा प्रभावी नहीं रही। ये वेबसाइट नए डोमेन के साथ फिर सक्रिय हो जाती हैं। अब टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी अश्लील कंटेंट लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
NGV PRAKASH NEWS

