
मई में भीषण गर्मी गायब: असामान्य मौसमी परिस्थितियों ने बदला मौसम का मिजाज
नई दिल्ली।
गर्मी के लिए कुख्यात मई माह में इस बार मौसम ने चौंकाने वाला रुख अपनाया है। आमतौर पर इस समय जहां तापमान 45 डिग्री के करीब पहुंच जाता है और लू के थपेड़े लोगों को बेहाल कर देते हैं, वहीं इस वर्ष मई का महीना अपेक्षाकृत शांत और ठंडा बना हुआ है। पिछले पंद्रह दिनों से उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है और मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले सप्ताह में भी लू चलने की कोई संभावना नहीं है।
125 वर्षों में दूसरी सबसे अधिक वर्षा
इस बार मई में वर्षा ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। देश के कई हिस्सों में मई के पहले पखवाड़े में ही इतनी वर्षा हो चुकी है कि यह 125 वर्षों में दूसरी सबसे अधिक वर्षा वाला मई बन चुका है। दिल्ली का ही उदाहरण लें तो सफदरजंग वेधशाला में मई महीने की सामान्य वर्षा जहां 10.8 मिमी होती है, वहीं इस वर्ष 16 मई तक 91.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जो औसत से 744 प्रतिशत अधिक है।
कौन से कारक हैं जिम्मेदार?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बदले हुए मौसम के पीछे एक नहीं बल्कि कई असामान्य मौसमी गतिविधियां ज़िम्मेदार हैं।
- उत्तर पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर लगभग 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है, जो अब धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर खिसक रहा है।
- एक और कम दबाव की रेखा उत्तर पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तर बांग्लादेश तक फैली हुई है।
- हरियाणा में समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर एक अन्य साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है।
इन सभी गतिविधियों के कारण वातावरण में लगातार नमी बनी हुई है, जिसके चलते तेज हवाएं और हल्की बारिश की स्थितियां बन रही हैं।
लगातार पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव
मौसम में आए इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ हैं। साथ ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी भी वातावरण में अस्थिरता बनाए हुए है। इस संयुक्त प्रभाव के कारण उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत, पूर्वी भारत और दक्षिण भारत तक में व्यापक रूप से गरज-चमक और बारिश हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिलसिला अभी कुछ दिन और जारी रहेगा। मई माह के अंत तक ही उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी की तीव्रता और लू की स्थितियां विकसित हो सकती हैं। इससे पहले तापमान में कोई बड़ा उछाल नहीं देखा जाएगा।
दिल्ली में तापमान में गिरावट
दिल्ली की बात करें तो 25 अप्रैल के बाद पहली बार 16 मई को अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस को पार कर सका, लेकिन इससे पहले लगातार बारिश और बादलों के कारण तापमान सामान्य से काफी नीचे बना हुआ था।
निष्कर्ष
गर्मी के सबसे उग्र माने जाने वाले महीने में मौसम की यह नरमी एक असामान्य लेकिन राहत भरी स्थिति है। हालांकि यह प्राकृतिक चक्र का ही हिस्सा है, लेकिन इससे फसल, जल आपूर्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है, जिसका विश्लेषण भविष्य में करना जरूरी होगा।
– NGV PRAKASH NEWS

