

दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके, झज्जर रहा केंद्र; पाकिस्तान और ईरान में भी धरती कांपी
नई दिल्ली, 10 जुलाई 2025 | NGV PRAKASH NEWS
गुरुवार सुबह राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में उस समय हड़कंप मच गया जब तेज बारिश के बीच धरती अचानक कांपने लगी। सुबह 9:04 बजे आए भूकंप के झटकों ने दिल्ली-एनसीआर समेत नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, हिसार और सोनीपत तक को हिला दिया।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 4.4 रिक्टर स्केल पर दर्ज की गई और इसका केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में था। झटके लगभग 10 सेकंड तक महसूस किए गए। कई इलाकों में लोग घबराकर अपने घरों, दफ्तरों और इमारतों से बाहर निकल आए। हालांकि अब तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस ने भी पुष्टि की है कि फिलहाल किसी नुकसान की सूचना नहीं है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों की सलामती की दुआ की और सभी से सावधानी बरतने की अपील की।
पाकिस्तान और ईरान में भी धरती कांपी
दिल्ली-एनसीआर में झटकों के कुछ ही घंटे बाद पाकिस्तान में भी रिक्टर स्केल पर 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इससे कराची और आसपास के क्षेत्रों में हलचल रही, हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
उधर, ईरान में भी आज सुबह दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब ईरान और इज़रायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या ईरान में हो रही गुप्त परमाणु गतिविधियां इन भूकंपों की एक अप्रत्यक्ष वजह हो सकती हैं? हाल के वर्षों में ऐसी आशंकाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं।
भूकंप क्यों आते हैं? जानिए वैज्ञानिक कारण
धरती के नीचे सात टेक्टोनिक प्लेट्स होती हैं, जो लगातार अपनी जगह बदलती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, खिसकती हैं या एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाती हैं, तो भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, जिससे धरती कांपती है। यही प्रक्रिया भूकंप कहलाती है।
भूकंप की तीव्रता को रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल से मापा जाता है, जो 1 से 9 तक होती है। 1 यानी बहुत हल्का और 9 यानी अत्यधिक विनाशकारी भूकंप। आमतौर पर 4 से 6 के बीच तीव्रता वाले भूकंप से संरचनात्मक नुकसान कम होता है, लेकिन घबराहट और अस्थायी अफरा-तफरी ज़रूर होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 4.4 तीव्रता वाला भूकंप कम खतरनाक की श्रेणी में आता है, लेकिन अगर इसका केंद्र अधिक आबादी वाले क्षेत्र में हो या इसकी गहराई कम हो, तो इसका प्रभाव अधिक महसूस किया जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदाएं बिना चेतावनी के दस्तक देती हैं। जरूरी है कि हम सब भूकंप जैसी आपदाओं के लिए तैयार रहें, जागरूक रहें और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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