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राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर बंट रहा खतरनाक कफ सिरप! भरतपुर में मासूम बीमार, सीकर में एक बच्चे की मौत, जयपुर में भी बिगड़ी बच्ची की हालत
नई दिल्ली, 01 अक्टूबर 2025
राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त में बांटे जा रहे कफ सिरप ने बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड नामक इस दवा को पीने के बाद भरतपुर, सीकर और जयपुर से गंभीर मामले सामने आए हैं। दावा है कि भरतपुर में 4 वर्षीय गगन की तबीयत बिगड़ी, सीकर में 5 वर्षीय नित्यांश की मौत हो गई और जयपुर में 2 साल की बच्ची की हालत गंभीर हो गई।
भरतपुर का मामला
बयाना ब्लॉक स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गगन को खांसी के इलाज के लिए यह सिरप दिया गया था। दवा पीते ही बच्चे को बेहोशी आने लगी और दिल की धड़कन तेज हो गई। परिजनों का आरोप है कि जब शिकायत पर स्वास्थ्य प्रभारी डॉक्टर ताराचंद योगी ने खुद वही सिरप पीकर देखा तो उनकी तबीयत भी बिगड़ गई।
सीकर में गई मासूम की जान
सीकर के खोरी ब्राह्मणान गांव में 5 साल के नित्यांश की जान इसी दवा के कारण चली गई। परिवार मामूली खांसी के लिए दवा लाया था, लेकिन बच्चे ने सिरप पीते ही सांस लेना बंद कर दिया।
जयपुर में भी बच्ची की हालत बिगड़ी
जयपुर के सांगानेर इलाके में भी 2 साल की बच्ची इस दवा से बीमार पड़ गई। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
जांच के आदेश और पाबंदी
मामलों के तूल पकड़ने के बाद राजस्थान सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। दवा पर रोक लगा दी गई है और सैंपल जांच को भेजे गए हैं। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने कहा कि भरतपुर, सीकर और अन्य जिलों से ऐसे मामले आए हैं, जहां दवा पीने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ी है। झुंझुनूं समेत कई जिलों से भी नमूने लेकर जांच हो रही है।
कंपनी पर सवाल
यह कफ सिरप के. संस फार्मा कंपनी की तरफ से बनाया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि राजस्थान सरकार के पास पहले से ही कंपनी की दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करने वाले दस्तावेज मौजूद थे। 5 अक्टूबर 2023 की रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि इस कंपनी की कुछ दवाएं मानक पर खरी नहीं उतरतीं। इसके बावजूद कंपनी ने अलग नाम से टेंडर हासिल कर लिया और दवा फिर से हेल्थ सेंटरों पर बांटी जाने लगी।
बड़ा सवाल
सरकार दावा करती है कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत हर दवा की जांच राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम करता है। लेकिन अगर जांच के बावजूद मानकहीन दवाएं जनता तक पहुंच रही हैं और बच्चों की जान ले रही हैं, तो जिम्मेदारी किसकी है?
यह मामला सिर्फ दवा की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही और जवाबदेही का भी है। जब सरकारी अस्पतालों से मुफ्त इलाज और दवा का भरोसा जनता को दिया जाता है, तो उसमें बच्चों की जान पर खेलने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
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